कोरोना वायरस ने प्रेमी जोड़ों के मिलने वाली जगहों पर भी पहरा बिठा दिया है। पुराना किला, लालकिला, जंतर-मंतर, चिड़िया घर, सिनेमा हाल, राजघाट जैसी जगहों को प्रशासन पहले ही बंद कर चुका है, लेकिन अब कनाट प्लेस, जनपथ, सेंट्रल पार्क और इंडिया गेट जैसी खुली जगहों पर भी बहुत कम संख्या में लोग दिखाई पड़ रहे हैं। इनमें प्रेमी जोड़े तो न के बराबर ही दिख रहे हैं। कोरोना का खौफ इतना बढ़ चुका है कि रेस्टोरेंट्स और मॉल्स में भी बहुत कम लोग दिखाई पड़ रहे हैं। प्रेम की बातों के बीच कोरोना के खौफ पर चर्चा ज्यादा देखी जा रही है।
कनाट प्लेस को दिल्ली का दिल कहा जाता है। प्रेमी जोड़े और पर्यटक दिल्ली आने पर पालिका बाजार अवश्य घूमते हैं। सेंट्रल पार्क में समय बिताना और जनपथ के बाजार में सस्ती कीमतों पर अपने प्रियजनों के लिए सामान खरीदना लोगों की शगल में शुमार हुआ करता है।
लेकिन बुधवार को यह दिल भी बेहद नीरस गति से धड़कता दिखाई दिया। बहुत कम संख्या में ही लोग इन जगहों पर घूमते नजर आए। जिस कनाट प्लेस में गाड़ियों के कारण लगातार जाम जैसी स्थिति देखने को मिलती है, वहां अघोषित कर्फ्यू लगा हुआ है और बहुत कम संख्या में लोग इधर-उधर जाते हुए दिखाई पड़ रहे हैं।
दिल्ली सरकार ने साप्ताहिक दुकानों को लगाने पर पाबंदी लगा दी है, लेकिन जनपथ जैसी जगहों पर अभी भी बाजार लग रहे हैं। लेकिन यहां भी लोगों का अकाल है। जिस जगह पर लोगों की भीड़ के कारण पैदल चलना दूभर हुआ करता है, वहां घूमने आए लोगों से ज्यादा दुकानदार ही नजर आ रहे हैं।
गारमेंट की शॉप लगाने वाले एक दुकानदार अजय गुप्ता ने बताया कि दीवाली के बाद यही सीजन उन लोगों की कमाई के लिहाज से सबसे ज्यादा अहम होता है। युवा लड़के-लड़कियां इसी समय नए साल के फैशन के मुताबिक जींस-टी शर्ट खरीदते हैं, लेकिन कोरोना की वजह से अब युवा लड़के बिल्कुल नहीं आ रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि उनके व्यापार पर उसी समय असर पड़ना शुरू हो गया था, जब विश्विद्यालय, हॉस्टल और अन्य शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया। अजय गुप्ता के मुताबिक ज्यादातर छात्र-छात्राएं अपने-अपने घरों को चले गए हैं। छात्रों के चले जाने से उनका व्यापार ठप पड़ गया है।
दिल्ली के जंतर-मंतर को देश की राजनीति और लोकतंत्र का प्राण कहा जाता है। संसद से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित इस ऐतिहासिक स्थल पर तमाम विपक्षी दल, स्वयं सेवी संगठन और सामाजिक समूह लगातार धरना-प्रदर्शन करते रहते हैं। इससे सत्ता को देश की जनता की आवाज का एहसास बना रहता है। लेकिन बुधवार दोपहर लगभग दो बजे जंतर-मंतर भी पूरी तरह निष्प्राण दिखाई पड़ा। यहां इक्के-दुक्के लोग अपने निजी कार्यों से आते-जाते दिखाई पड़े।
पूरी दिल्ली में सबसे ज्यादा खुली जगह के लिए इंडिया गेट ही जाना जाता है। इसीलिए प्रेमी जोड़े दोपहर, तो परिवार वाले शाम को यहां समय बिताने के लिए आते हैं। लेकिन बुधवार शाम साढ़े चार बजे तक यहां न के बराबर ही लोग दिखाई पड़े। इक्के-दुक्के प्रेमी जोड़े ही पेड़ों की छांव में बैठे दिखे।
अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के जो रेस्टोरेंट लोगों से खचाखच भरे रहते हैं, जहां लोगों को खाने के लिए भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है, ऐसे रेस्टोरेंट भी लगभग सूने पड़े हुए हैं। ऐसे ही एक रेस्टोरेंट के मैनेजर शेखर ने बताया कि उनके यहां ग्राहकों को अपनी बारी की प्रतीक्षा में आधे-आधे घंटे तक खड़े रह जाना पड़ता है लेकिन इस समय बहुत कम लोग आ रहे हैं। उनका स्टाफ काम के अभाव में खाली बैठा रहता है।
पूर्वी दिल्ली के वीथ्रीएस मॉल से लेकर कनाट प्लेस के गुजराती खानों के लिए प्रसिद्ध रेस्टोरेंट्स में लोग नहीं पहुंच रहे हैं। एक कर्मचारी देविंदर सिंह के मुताबिक दोपहर के समय यहां प्रेमी जोड़े आकर कुछ खाते हैं और एकांत में समय बिताते हैं। लेकिन जब से कोरोना का खौफ छाया है, लोगों ने यहां आना ही बंद कर दिया है।