रसायनी बाबा कहते हैं कि शतचंडी पाठ, महायज्ञ के बाद असल का प्रसाद भंडारा ही है। शतचंडी महायज्ञ और पाठ में देश के कोने-कोने से साधु, पंडित, आचार्य हिस्सा लेते हैं। इसमें सभी वर्ग के लोग एक पांत में बैठकर प्रसाद प्राप्त करते हैं। भंडारा होने पर ही भक्त को नवरात्रि में पूजा का पुष्य प्राप्त होता है।
रसायनी बाबा का कहना है कि वह खुद दशकों से इस परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं। इसलिए इस बार भी तैयारी पूरी है। भंडारा के समय में आने वाले श्रद्धालुओं के कैसे मना किया जा सकता है।
रसायनी बाबा आयुर्वेद में वर्णित भस्म, रसायन, अवलेह, औषधि के मर्मज्ञ हैं। उनका कहना है कि गाय को गौ माता कहा गया है। 84 योनि में किसी को यह सौभाग्य नहीं मिला। उनका कहना है कि गाय के गोबर, मूत्र, घी, दूध सबमें तमाम औषधीय गुण हैं। यही वजह है कि प्राचीन काल से ऋषि, मनीषी घर, कुटिया, आश्रम में गाय के गोबर का लेप लगवाते रहे।
कच्चे मकानों में आज भी ऐसा होता है, क्योंकि गाय के गोबर के लेप के बाद वहां हानिकारक, जीवाणु, कीटाणु स्वत: निष्क्रिय या नष्ट हो जाते हैं। उनका कहना है कि श्रीयोग शक्तिपीठ में इसलिए वह लगातार गाय के गोबर से मंदिर प्रांगण, यज्ञ स्थल का लेपन कराते हैं।