कोरोना काल ने हर किसी के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम को भी बड़ा झटका लगा है। क्योंकि, निगम के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा वायरस ‘निगल’ गया है। सड़कों पर खड़े खराब वाहनों से प्राप्त होने वाला राजस्व इस बार पिछले तीन वर्षों के मुकाबले महज 10 फीसदी पर सिमट गया है। इसके पीछे कई वजह हैं। 24 मार्च को हुए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण कर्मचारियों की संख्या अचानक कम हो गई। कुछ कर्मचारी राजस्व लेने निकले भी तो लोगों ने लॉकडाउन का हवाला देकर टाल दिया। पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे निगम ने अब राजस्व बढ़ोतरी के लिए दोबारा प्रयास शुरू किए हैं।
राजधानी के कई इलाकों में पार्किंग नहीं है। नेता सदन योगेश वर्मा ने बताया कि निगम के अंतर्गत आने वाली सड़कों पर कई वर्षों से खराब वाहन खड़े हैं। कई के तो स्वामियों का ही पता नहीं है। इन जगहों पर गंदगी पसरी रहती है। इस वजह से न केवल मच्छरजनित बीमारियां पनपती हैं बल्कि कई कॉलोनियों में पार्किंग की समस्या के साथ-साथ खराब वाहन झगड़े की वजह भी बनते हैं। ऐसे वाहनों को सड़कों पर खड़ा करने के आरोप में निगम की पर्यावरण प्रबंधन समिति (डेम्स) और लाइसेंस विभाग चालान करता है, जिससे राजस्व मिलता है।
इतनी हुई कमाई
उत्तरी निगम के अंतर्गत करोलबाग, रोहिणी, नरेला, शहरी सदर पहाड़गंज, केशवपुरम और सिविल लाइन जोन आते हैं। साल 2018 में निगम को सभी जोन से 2,87,25,843 रुपये का राजस्व मिला था। 2019 में 75,53,977 रुपये मिले, जबकि इस साल अभी तक केवल 28,97,240 रुपये का ही राजस्व मिला है।
दो जोन में 76 वाहन खराब
करोलबाग और रोहिणी जोन में ही अकेले 76 खराब गाड़ियां खड़ी हुई हैं। इसमें रोहिणी जोन में 52 और करोलबाग में 24 गाड़ियां शामिल हैं। योगेश वर्मा का कहना है कि सभी जोन में 200 से ज्यादा खराब वाहन खड़े हैं।
10 हजार गाड़ियों की मिल सकती है पार्किंग
निगम के नेता सदन का कहना है कि यदि इन सभी गाड़ियों को हटा दिया जाए तो राजधानी में करीब 10 हजार गाड़ियों को पार्किंग की जगह मिल सकती है।
कहां कितने चालान
जोन वाहनों की संख्या कुल राशि
करोलबाग 1,120 80,79,659
रोहिणी 804 34,97,500
नरेला 05 20,990
एसपी सिटी 00 00
केशवपुरम 00 42,99,369
सिविल लाइन 642 38,69,492