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दिल्ली के अस्पतालों में मासूमों पर कोरोना का असर कम, डॉक्टरों ने बताई बड़ी वजह

Wed, 04 Nov 2020 04:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
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demo pic - फोटो : amar ujala
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कोरोना वायरस का खतरा मासूम जिंदगियों पर कम दिखाई दे रहा है। दिल्ली के अस्पतालों में पिछले आठ माह के दौरान आए मामलों के आधार पर डॉक्टरों का कहना है कि 10 वर्ष की आयु से कम बच्चों में कोरोना वायरस की मृत्युदर एक फीसदी से भी कम मिल रही है। हालांकि, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से 1 मार्च से अब तक स्कूलों का बंद होना भी शामिल है।

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कोविड विशेष लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश का कहना है कि उनके यहां अब तक आठ हजार से ज्यादा संक्रमित मरीजों को उपचार दिया जा चुका है, जिनमें सबसे कम संख्या छोटे बच्चों की है। वहीं मृत्युदर अन्य आयु वर्ग के मरीजों की तुलना में बेहद कम है। एक सवाल पर उन्होंने यहां तक कहा है कि भर्ती बच्चों में संक्रमण के हल्के लक्षण मिले हैं।

साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. विवेका कुमार का कहना है कि बच्चों में संक्रमण के मामले कम दर्ज किए जा रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोरोना के आगे यह बच्चे सुरक्षित हैं। बच्चों के साथ साथ बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं को खास ख्याल रखने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अस्पतालों के आंकड़ों में छोटे बच्चे कम संक्रमित मिले हैं। उनके यहां भी ऐसी ही स्थिति है।
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कालरा अस्पताल के निदेशक डॉ. आरएन कालरा का कहना है कि बच्चों में कोरोना का संक्रमण कम मिल रहा है। इसके पीछे एक वजह स्कूलों का बंद होना है। साथ ही अभिभावकों की देखभाल भी है, जो लॉकडाउन से लगातार बच्चों और बुजुर्गों को घरों पर सुरक्षित रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक दो फीसदी से कम संक्रमित मरीज 10 वर्ष की आयु से कम हैं। हालांकि 10 से 20 वर्ष की आयु के बीच मरीजों की संख्या इससे ज्यादा है।

सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. घीरेन गुप्ता का कहना है कि उनके यहां अब तक तीन हजार संक्रमित मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें से 10 वर्ष की आयु से कम केवल 80 बच्चे थे। यानी, कुल भर्ती हुए मरीजों में दो फीसदी ही 10 साल से कम उम्र के थे। उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकतर बच्चों में कोरोना के बहुत हल्के लक्षण थे। कई बच्चों को सिर्फ बुखार की शिकायत थी। जांच करने पर पता चला कि वह कोरोना संक्रमित हैं।

जीटीबी में तीन से चार फीसदी संक्रमित ही 10 वर्ष से कम आयु के मिले
पूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े जीटीबी अस्पताल में केवल तीन से चार फीसदी कोरोना संक्रमित ही 10 वर्ष से कम आयु के मिले हैं। इनमें अधिकतर बच्चे अस्पताल से स्वस्थ होकर लौटे हैं। आरएमएल अस्पताल के मुताबिक, उनके यहां अभी तक करीब 7 हजार मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें बच्चों की संख्या 400 के आसपास रही।

एक फीसदी बच्चों को भी वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ी
अस्पतालों के अनुसार, कुल भर्ती हुए बच्चों में से एक फीसदी को भी वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ी। अलग-अलग अस्पतालों में बच्चों की गंभीर हालत होेने के एक या दो ही मामले देखे गए हैं। इसके अलावा लोकनायक अस्पताल के ही एक डॉक्टर का कहना है कि उनके यहां अब तक 450 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें से एक बच्चे को छोड़कर किसी को भी संक्रमण नहीं हुआ।

लगातार बढ़ती रहती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
डॉ. घीरेन गुप्ता बताते हैं कि बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता लगातार बढ़ती रहती है। छोटे बच्चे हर समय सांस के कई प्रकार के वायरस का सामना करते रहते हैं, उनका शरीर खुद ही उन वायरस से लड़ने की क्षमता पैदा करता रहता है, इसलिए कई मायनों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अन्य लोगों की तुलना में बेहतर होती है। कोरोना से संक्रमित होने के बावजूद बच्चों में वह स्थिति पैदा नहीं हो पाती, जो कि वयस्कों में देखी जाती है।

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