कोरोना के बढ़ते संकट के कारण इन दिनों दिल्ली ही क्या, देशभर की रफ्तार थम सी गई है। जानलेवा वायरस से बचाव के लिए लोग घरों में कैद हो गए हैं। व्यापारी वर्ग से लेकर नौकरीपेशा लोग तक इन दिनों परिवार के साथ अधिक समय बिता रहे हैं। वे दूरदराज रहने वाले रिश्तेदारों को भी बार-बार फोन कर हाल ले रहे हैं। इससे न केवल अपनों के बीच की दूरियां कम हुई हैं, बल्कि उनकी दिनचर्या भी बदल गई है।
पहाड़गंज निवासी अनिल ने बताया कि कोरोना का प्रकोप दिल्ली पहुंचने के बाद इलाके के लोगों में डर है। अमूमन सभी लोग घरों में परिजनों के साथ समय बिता रहे हैं। इससे रिश्तों की दूरी भी एक तरह से कम हुई है। दूरदराज रहने वाले रिश्तेदार भी समय-समय पर कॉल कर मौजूदा हालात और परिवार की कुशल-क्षेम के बारे में जानकारी ले रहे हैं।
पुरानी दिल्ली स्थित घर-परिवार संगठन आरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष निखिल रस्तोगी ने कहा कि जिन रिश्तेदारों से वर्षों से बात नहीं हुई थी, कोरोना के कारण उनसे भी बात हो रही है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में कई रिश्तेदार रहते हैं। जब पता चला कि कोरोना वायरस का डंक राजस्थान में भी पहुंच गया है तो हमने अपने उन रिश्तेदारों से भी संपर्क किया, जिनसे वर्षों से बात नहीं हुई थी। इसके बाद अब उन रिश्तेदारों के भी हमें लगातार फोन आ रहे हैं।
परिवार के साथ फिल्म देखते हुए बीत रहा समय
घरों में लोग इन दिनों परिवार के साथ टीवी पर मूवी और अन्य कार्यक्रम देखकर समय बिता रहे हैं। पुरानी दिल्ली स्थित चौक रायजी में रहने वाले आरडब्ल्यूए सदस्य प्रवीण ने बताया कि कोरोना के कारण इस समय व्यापार भी पूरी तरह ठप है। ऐसे में परिवार के साथ ही घर में रहकर टीवी पर मूवी और अन्य कार्यक्रमों का लुत्फ उठा रहे हैं।
पूरी तरह बदल चुकी है दिनचर्या
पटेल नगर निवासी सुभाष शर्मा ने बताया कि कोरोना के कारण उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। इससे सैनेटाइजेशन जैसी कुछ अच्छी आदतें भी जीवनशैली में शामिल हो गई हैं। अब कभी जरूरत होने पर घर से बाहर जाना होता भी है तो आने पर हाथ सेनेटाइज करने के बाद ही भीतर आते हैं। साथ ही, हाथ बार-बार साबुन से धोने की आदत भी हो गई है। पहले पूरा दिन अपनी दुकान पर बीतता था, अब पूरा दिन घर में ही रहते हैं।