कोरोना टाइपराइटर पर गीता टाइप करते इस्कॉन संस्थापक...
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जिस तरह आज कोरोना वायरस ने दुनियाभर में इंसान के जीने का तरीका बदल दिया है, ठीक उसी प्रकार लगभग 60 साल पहले इस्कॉन के संस्थापक अभय चरण भक्तिवेदांत स्वामी ने दिल्ली-6 से खरीद कर लाए एक कोरोना टाइपराइटर से दुनियाभर में कृष्ण भक्ति की रूपरेखा बदल कर रख दी थी।
भक्तिवेदांत स्वामी ने वर्ष 1960 में वृंदावन से दिल्ली आकर चांदनी चौक के छिपीवाड़ा में 200 गज की एक छोटी सी जगह पर अपना स्थान बनाया था। मालीवाड़ा बाजार से उन्होंने 32 रुपये का एक कोरोना टाइपराइटर खरीदा था। इसी टाइपराइटर से उन्होंने श्रीमदभगवत गीता का संस्कृत से अंग्रेजी में अनुवाद कर टाइप किया था।
उन्होंने ही इसकी प्रूफरीडिंग की थी और प्रिंट करवाया था। उन्होंने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति डॉ जाकिर हुसैन, शिक्षा मंत्री केएल श्रीमाली और गीता प्रेस के प्रमुख हनुमान प्रसाद पोद्दार को भी श्रीमदभगवतम् की एक-एक प्रति भेंट की थी।
दुनिया में बदल गई कृष्ण-भक्ति की रूपरेखा
आज दुनिया भर में इस्कान द्वारा बनाए भगवान श्री कृष्ण के 700 मंदिर हैं। अकेले भारत में 108 मंदिर हैं। भगवान श्री कृष्ण के दुनियाभर में लाखों भक्त हैं। लेकिन यह सब तब संभव हो पाया जब अभय चरण भक्तिवेदांत स्वामी कृष्ण भक्ति का प्रचार प्रसार करने अमेरिका जा पहुंचे। उस समय पूरी दुनिया अंग्रेजी भाषा और अमेरिका की तरफ देख रही थी। इसलिए उन्होंने वर्ष 1966 में इस्कॉन का पहला मंदिर भी 20 सेकंड एवेन्यू न्यूयॉर्क में बनवाया। जहां से भगवान श्रीकृष्ण दुनिया भर में सुगमता के साथ पहुंच गए।
दुनियाभर के इस्कॉन मंदिरों का केंद्र है चांदनी चौक
चांदनी चौक मंदिर के सदस्य नीलकंपठ दास ने बताया की 25 जुलाई सन 1967 को वेदांती महाराज अमेरिका से वापस आए और चांदनी चौक में इस्कॉन की आधारशिला रखी। इसी मंदिर के अंदर वेदांती जी से जुड़ी स्मृतियों को संजोकर रखा गया है। यहां पर कोरोना टाइपराइटर पर काम करते हुए अभय चरण भक्तिवेदांत स्वामी की तस्वीरें आज भी देखी जा सकती हैं। कोरोना काल में जिनकी प्रासंगिकता बढ़ गई है।
कोरोना टाइपराइटर
अमेरिका की स्मिथ कोरोना टाइपराइटर कंपनी की स्थापना 1886 में लेमैन, विलबर्ट, मोनरो और अर्लबर्ट स्मिथ ने मिलकर की थी।