कोरोना से बचने और उसे हराने के लिए अस्पताल में भर्ती मरीज अब अपने घर से कंबल ला रहे हैं। बीके अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी मरीजों को कोरोना से बचने के लिए इससे संबंधित जानकारी दी जा रही है। भर्ती मरीजों से मिलने के पहुंचने वाले तीमारदारों की संख्या भी एक समय पर केवल एक व्यक्ति की कर दी गई है।
अब तक कोरोना वायरस विश्व के 140 से अधिक देशों में फैल चुका है। इस वायरस को फैलाने में चीन के वुहान शहर का बड़ा हाथ है। जिससे आज पूरा विश्व संकट में है। लेकिन इससे बचने के लिए अब सभी देशों के लोगों में जागरूकता देखने को मिल रही है। सभी बड़े से बड़े राष्ट्र अध्यक्ष भी एक-दूसरे से हाथ मिलाने की बजाय हाथ जोड़ने लगे हैं।
कोरोना वायरस को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का ही असर है कि सरकारी अस्पताल में मरीज अब खुद के ही कंबल लेकर पहुंच रहे हैं। अस्पताल में भर्ती होने के बाद ज्यादातर मरीज सरकारी कंबलों को न कह रहे हैं। उधर, अस्पताल प्रशासन ने भी लोगों की अनावश्यक भीड़ को कम करने के लिए एक मरीज के साथ सिर्फ एक ही तीमारदार को प्रवेश की अनुमति दी है। मरीज के साथ आने वाले अन्य तीमारदारों को अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा।
ओपीडी में भी कम हो रही है मरीजों की संख्या
बीके सिविल अस्पताल में बुधवार को ओपीडी क्षेत्र में मरीजों की तादाद बेहद कम रही। जुकाम- खांसी से पीड़ित मरीजों की ओपीडी के अलग से फ्लू कॉर्नर बनाया गया है जबकि अन्य मरीजों की ओपीडी सामान्य कक्ष में ही लगाई जा रही है।
फ्लू कॉर्नर में मरीजों की संख्या 150 के पार रही जबकि सामान्य ओपीडी में औसत से करीब 40 फीसदी मरीजों की संख्या कम रही। दिल के मरीज, हड्डी रोगी, दिमाग के मरीजों की संख्या औसतन काफी अधिक रहती है। बुधवार को इन ओपीडी कक्ष के बाहर कुछ ही मरीज पहुंचे। वही इमरजेंसी कक्ष में सफाई व्यवस्था व भर्ती मरीजों के इलाज के लिए व्यवस्था दुरुस्त की गई है।
सुरक्षाकर्मियों को झेलनी पड़ रही लोगों की नाराजगी
बीके अस्पताल में भर्ती मरीज से मिलने वाले परिजनों की संख्या को सीमित कर दिया गया है। एक समय में एक ही रिश्तेदार अपने मरीज से मिल सकता है। नए आदेशों के बाद मरीजों के तीमारदार सुरक्षाकर्मियों से बहस और लड़ाई पर आमादा है। मंगलवार देर शाम से बुधवार दोपहर तक जच्चा-बच्चा व बच्चा वार्ड में प्रवेश के लिए कई बार मरीज के तीमारदारों और अस्पताल सुरक्षाकर्मियों के बीच गर्मागर्मी हुई। ऐसे में सुरक्षाकर्मियों के लिए लोगों पर अंकुश लगाना काफी चुनौतीपूर्ण