साइकिल पर घर की ओर जाते प्रवासी मजदूर (फाइल फोटो)
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मजदूरों की घर वापसी के कारण व्यापारियों और उद्यमियों की परेशानी बढ़ने लगी है। सरकार की ओर से अनुमति मिलने के बावजूद कारोबारियों को कामगार ही नहीं मिल रहे हैं। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल दिल्ली प्रदेश के महामंत्री हेमंत गुप्ता, राकेश यादव, प्रदीप गुप्ता का कहना है कि अगर दिल्ली से अधिकतर मजदूर पलायन कर गए तो व्यापार चलाना मुश्किल हो जाएगा।
दिल्ली के उद्योग व व्यापार में पूर्वांचल के मजदूरों का महत्वपूर्ण योगदान है। नरेला, झिलमिल, बादली, सोनिया विहार समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्र तो इन्हीं के भरोसे है। फैक्ट्री मालिकों के समझाने के बावजूद कामगार दिल्ली में रुकने को तैयार नहीं हो रहे है। ऐसे में व्यापार को पटरी पर लाना बेहद ही मुश्किल हो जाएगा।
व्यापारी अजय अरोड़ा कहना है कि पूर्वी दिल्ली और पुरानी दिल्ली का व्यापार तो पूर्वांचल के कारीगरों पर ही टिका है। रेडिमेड कपड़ा सिलने, कपड़े की रंगाई करने समेत लेथ पर काम करने में वहीं पारंगत है। सोना-चांदी के व्यापारी विमल गोयल, योगेश सिंघल का भी कहना है कि पूर्वांचल, राजस्थान के मजदूर कारीगरों के भरोसे ही ज्वेलरी बनाई जाती है। ऐसे में उनके पलायन का असर दिखेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल स्टेट में भी मजदूरों की अहम भूमिका होती है।
लिहाजा इस क्षेत्र में भी असर दिखेगा। आजाद पुर मंडी के व्यापारी संदीप खंडेलवाल व महेंद्र सनपाल का कहना है कि कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते संक्रमण से मजदूर डरे हुए है। वह बार-बार मांग कर रहे है कि उन्हें किसी तरह इंतजाम करा कर वापस घर भेजा जाए। पूर्वांचल ही नहीं दूसरे राज्यों के मजदूर भी दिल्ली में रहने को तैयार नहीं हैं।