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आप व कांग्रेस के बीच बंद नहीं हुए बातचीत के दरवाजे, दोनों दलों के नेताओं की नहीं टूटी उम्मीद

Wed, 06 Mar 2019 04:07 AM IST
Priyesh Mishra संतोष कुमार, दिल्ली
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कांग्रेस, आप
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित की गठबंधन से मनाही के बावजूद भी कांग्रेस व आप के बीच समझौते की उम्मीद अभी टूटी नहीं है। सूत्र बताते हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियां गठबंधन पर चर्चा कर सकती हैं। सियासी नफे-नुकसान के आकलन के आधार पर दोनों पार्टियां इस मसले पर चर्चा करेंगी। आप के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि गठबंधन के लिए उसके दरवाजे अभी खुले हैं। जबकि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सियासत में अंतिम कुछ भी नहीं होगा। अभी पार्टी फोरम पर इस मसले पर चर्चा होगी।
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आप का मानना है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद जिस तरह से सियासी माहौल बदला है, उससे भाजपा को अकेले दम पर शिकस्त देना बड़ी चुनौती है। महागठबंधन में शामिल सभी क्षेत्रीय पार्टियां इसे बखूबी समझ रही हैं। सभी दलों का आप पर दबाव है कि वह दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर भाजपा को शिकस्त देने की रणनीति पर काम करे। आप का मानना है कि बेशक कांग्रेस के साथ उसके बुनियादी मतभेद रहे हैं, लेकिन लोक सभा चुनाव के लिए इन्हीं हालातों में वह समझौता करने को तैयार है। 

आप सूत्रों का कहना है कि पार्टी एक फार्मूले के तहत कांग्रेस से समझौता करना चाहती है। इसके लिए उसने अपनी तरफ से दिल्ली में 6, पंजाब में 4 व चंडीगढ़ सीट मांगी थी। लेकिन कांग्रेस की तरफ से दिल्ली के लिए तीन-तीन सीट का फार्मूला सामने आया है। जबकि एक सीट पर दोनों दलों को मंजूर किसी नेता का चुनाव लड़ाने की बात है। आप नेताओं का कहना है कि अगर कांग्रेस के फार्मूले को ही मान लिया जाए तो दिल्ली के साथ पंजाब में भी आप व भाजपा के बीच 6-6-1 का फार्मूला लागू होना चाहिए। इसी फार्मूले पर हरियाणा के लिए बात हो। पार्टी इस फार्मूले पर भी कांग्रेस के साथ समझौता करने को तैयार है। 
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आप के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि गेंद कांग्रेस के पाले में है। अभी कांग्रेस के भीतर ही समझौते को लेकर अंतरर्विरोध है। ऐसी हालत में आप का इस पर ज्यादा कुछ कहना संभव नहीं है। फिर भी, अगर कांग्रेस आप के साथ संजीदगी से गठबंधन पर चर्चा करना चाहती है तो आप के दरवाजे इसके लिए खुले रहेंगे। उधर, कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि बेशक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित गठबंधन से मना कर रही हैं, लेकिन सियासत में कभी भी संवाद एकदम खत्म नहीं होता। अभी इस मसले पर  आगे भी चर्चा होगी।
 
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लोक सभा चुनाव 2014 में मिले वोट


भाजपा: 46.6 फीसदी
आप: 33.1 फीसदी
कांग्रेस: 15.3 फीसदी

विधान सभा चुनाव 2015 में मिले वोट
आप: 54 फीसदी
भाजपा: 32.3 फीसदी
कांग्रेस: 9 फीसदी

2017 एमसीडी चुनाव में मिले वोट
भाजपा: 37 फीसदी
आप: 26 फीसदी
कांग्रेस: 21 फीसदी
 
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