- डीयू के कुलसचिव की ओर से कॉलेज प्रबंधन को लिखा गया पत्र, नियुक्ति को यूजीसी के नियमों के खिलाफ बताया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सेंट स्टीफंस कॉलेज में प्राचार्य के तौर पर प्रो. जॉन वर्गीज़ की नियुक्ति को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय ने एतराज जताया है। विश्वविद्यालय कुलसचिव ने कॉलेज प्रबंधन को पत्र लिखकर प्रो. जॉन वर्गीज़ को अंग्रेजी विभाग में सीधे प्रोफेसर पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करने पर आपत्ति जताई। पत्र में कुलसचिव ने इसे यूजीसी के नियमों के खिलाफ कहा है। विश्वविद्यालय के अनुसार कॉलेजों में सीधे प्रोफेसर पद पर नियुक्ति का कोई नियम नहीं है। पहले शिक्षक की नियुक्ति असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में होती है और बाद में पदोन्नति के जरिए प्रोफेसर बनाया जाता है।
डीयू ने कहा कि प्रो. जॉन वर्गीज़ को प्राचार्य के रूप में दूसरा कार्यकाल देना भी यूजीसी नियम 2018 का उल्लंघन है। यह मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। विश्वविद्यालय ने कॉलेज को निर्देश दिया कि यदि गवर्निंग बॉडी ने इस संबंध में कोई सिफारिश की है तो उस पर कार्रवाई न की जाए। विश्वविद्यालय ने कहा कि प्रो. जॉन वर्गीज़ को उनके मूल संस्थान में वापस भेजा जाना चाहिए और उनकी पेंशन व अन्य सेवानिवृत्ति लाभ भी वहीं से दिए जाने चाहिए।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यूजीसी केवल कॉलेजों में लेक्चरर- सहायक प्रोफेसर के स्थायी पदों को ही मंजूरी देता है। यूजीसी रेगुलेशंस 2018 और विश्वविद्यालय के वैधानिक नियमों में किसी कर्मचारी या व्यक्ति को सीधे प्रोफेसर के पद पर समायोजित करने का कोई प्रावधान नहीं है। पत्र में कहा गया है कि कॉलेजों में नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों को ही करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों पर पदोन्नति दी जाती है। ऐसे में किसी व्यक्ति को सीधे प्रोफेसर के रूप में समायोजित करना नियमों के खिलाफ माना जाएगा।
विश्वविद्यालय ने सेंट स्टीफंस कॉलेज को निर्देश दिया कि गवर्निंग बॉडी की ओर से यदि इस संबंध में कोई सिफारिश की गई है तो उस पर कार्रवाई न की जाए। कहा कि यूजीसी द्वारा सेंट स्टीफंस कॉलेज को दिए गए फंड से उनके पेंशन या सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान नहीं किया जा सकता।