दो कौड़ी के नेताओं, अफसरों का बयान देकर आलोचनाओं से घिरे केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के राजनीतिक दांवपेंच नई तरह की राजनीतिक को जन्म दे रहे हैं। ऐसी राजनीति जिसमें सत्ता का सुख भोगते हुए सत्ता के केंद्र में बैठे अपने दूसरे साथियों के खिलाफ आवाज उठाई जाए।
लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर राव ऐसा कब तक करते रहेंगे। राव केंद्र सरकार में रहते हुए भी चंडीगढ़ की सत्ता के लिए मुख्यमंत्री को आंख दिखाते रहते हैं। इससे न सिर्फ जनता में भ्रम की स्थिति है बल्कि यह भी संकट रहता है कि विपक्ष की तरह बोलने की वजह से उनके क्षेत्र में काम कम होंगे।
इंद्रजीत अहीरवाल के सबसे बड़े नेता के तौर पर जाने जाते हैं। विशाल हरियाणा पार्टी नाम से प्रदेश का पहला क्षेत्रीय दल बनाने वाले उनके पिता राव बीरेंद्र सिंह भी इसी स्वभाव के थे। राव बीरेंद्र सिंह 1967 में मुख्यमंत्री रहे थे। इसके बाद दक्षिण हरियाणा के किसी भी राजनेता को यह पद नहीं मिला।
अपने पिता के पद तक पहुंचने की हसरत राव इंद्रजीत में बहुत पहले से रही है। हमेशा वह सीएम की रेस में रहते हैं लेकिन चाहे कांग्रेस नेतृत्व रहा हो या फिर भाजपा, उन्हें केंद्र सरकार में रखना ही मंजूर किया।
चंडीगढ़ की कमान उनके हाथ नहीं आई। राजनीति के जानकार कहते हैं कि मुख्यमंत्री न बन पाने की टीस ही राव से ऐसा बयान दिला रही है जिसमें वह चंडीगढ़ में बैठे नेताओं को दो कौड़ी का कह देते हैं।
उन्होंने यूपीए-1 और 2 में सत्ता सुख भोगते हुए भी हरियाणा के तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को परेशान किए रखा। दक्षिण हरियाणा के विकास और नौकरियों में भेदभाव के खिलाफ केंद्र में मंत्री रहते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी। गैर राजनीतिक संगठन हरियाणा इंसाफ मंच बनाकर हुड्डा को घेरे रखा।
लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में आए। चुनाव जीते, केंद्र में रक्षा राज्य मंत्री बने लेकिन निगाह चंडीगढ़ दरबार पर लगी रही। यही कारण रहा कि सीएम की दौड़ में उनका भी नाम था। लेकिन सीएम संघ और मोदी के प्रिय मनोहरलाल बन गए।
तभी से मनोहरलाल भी उन्हें खटक रहे हैं। वह सार्वजनिक मंचों पर मनोहर लाल को भी अपने बयानों से असहज कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी के मुद्दे पर उन्होंने मनोहर लाल के खिलाफ आवाज उठाई। हालांकि राव का कहना है कि वह तो हमेशा जनता की लड़ाई लड़ते हैं। भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं। इसमें वह नफा नुकसान नहीं देखते।
राव इंद्रजीत नए तरह की राजनीतिक परिभाषा गढ़ रहे हैं। वह कभी किसी एक तरफ नहीं जाते। सत्ता सुख भी भोगते रहते हैं और सत्ता में बैठे अपने साथियों को आंख भी दिखाते रहते हैं। विपक्ष के तरह का रवैया जनता में भ्रम पैदा कर रहा है। -अशोक दिवाकर, शिक्षाविद