अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात सूरजकुंड क्रॉफ्ट मेले की शोभा बढ़ाने के लिए चाहे जितने बड़े डिजाइनर आ जाएं, लेकिन इसमें जान फूंकती आ रही हैं निसार अहमद की तीन पीढ़ियां।
इस मेले की शान यहां की झोपड़ियां हैं, जिन्हें यही परिवार तैयार करता है। यहां तक कि सिर्फ मेले के लिए वह फूस की खेती करते करते हैं। प्राचीन काल की विलुप्त होती जा रही संस्कृति से नई पीढ़ी के लोगों को रूबरू कराने के लिए सूरजकुंड मेले का आयोजन पिछले 28 साल से हो रहा है।
मेले में ग्रामीण परिवेश की झलक दिखाने के लिए जरूरी है झोपड़ी। इसके लिए फूस की जरूरत पड़ती है। निसार का कहना है कि वह मेले के लिए 100 एकड़ जमीन पर सात महीने फूस की खेती करते हैं। उनके पास 22 एकड़ जमीन है, बाकी 78 एकड़ पट्टे पर लेते हैं।
तहसील हथीन के रूपडाका गांव निवासी निसार के परिवार की तीन पीढ़ियां पिछले 28 साल से मेले के लिए फूस तैयार करके झोपड़ी बनाते हैं। मेले की शुरुआत वर्ष 1987 में हुई थी।