पुलिसिंग के साथ अब सिविल पुलिस ने पार्किंग का संचालन भी शुरू कर दिया है। रेलवे की जमीन पर चल रहा पार्किंग ठेका खत्म हुआ तो अब यहां सिविल पुलिस की मौखिक अनुमति पर प्राइवेट लोगों ने पार्किंग वसूली शुरू कर दी है।
शिकायत पर रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचे तो ठेकेदार ने बताया कि पुलिस ने उन्हें वाहन चोरी रोकने के लिए यहां पार्किंग चलाने की जिम्मेदारी दी है।
इस मामले में अब रेलवे अधिकारी और सिविल पुलिस आमने-सामने आ गई है। डीटीएम ने आरपीएफ को पत्र लिख अवैध पार्किंग को बंद कराने के लिए कहा है।
रेलवे ने करीब पांच लाख रुपये महीना पर यह पार्किंग ठेकेदार को दी थी। 30 नवंबर को ठेके की अवधि खत्म हो गई। ठेके में घाटा होते देख ठेकेदार ने इसका नवीनीकरण नहीं कराया और पार्किंग छोड़कर चला गया।
करीब 800 बाइक खड़ी होने की क्षमता वाली इस पार्किंग को फ्री कर दिया गया था। रेलवे अधिकारियों का आरोप है कि अब सिविल पुलिस ने पार्किंग वसूली शुरू करा दी। 22 दिन से इस पार्किंग पर लोगों से अवैध वसूली की जा रही है।
अफसरों की प्लानिंग से रेलवे को रहा घाटा
30 नवंबर को इस पार्किंग का ठेका खत्म हो गया है। ऐसी स्थिति में विभाग को ठेका खत्म होने से ही नया ठेका छोड़ने की प्रक्रिया शुरू करनी थी, लेकिन अधिकारी तब जागे जब ठेका खत्म हो गया। अब 22 दिन से बंद पड़ी पार्किंग के चलते रेलवे को एक महीने में तकरीबन 5 लाख का घाटा झेलना पड़ेगा।
वहां रोजाना बाइक चोरी होने की घटनाएं हो रही थी। जीआरपी-आरपीएफ इसकी
रिपोर्ट दर्ज नहीं करती। ऐसे में निगरानी के लिए लोगों को बैठाया गया है।-सचिन कुमार, चौकी इंचार्ज