अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए गिटार टीचर को अपनी सहयोगी से रेप के आरोप में मिली सजा को रद्द कर दिया।
अदालत ने कहा कि दरअसल ऐसे मामलों में असली पीड़ित तो पुरुष की पत्नी है, जिससे दोनों के संबंधों से यह धोखा हुआ है।
न्यायमूर्ति एसपी गर्ग ने अपने फैसले में कहा कि यदि कोई बालिग लड़की विवाह का वायदा मिलने पर यौन संबंध की सहमति देती है और गर्भवती होने के बाद भी उसे जारी रखती है तो उसे सहमति से बनाया हुआ संबंध माना जाएगा।
अदालत ने याची को 10 वर्ष कैद की सजा को रद्द करते हुए कहा कि यह रेप व धोखाधाड़ी का मामला नहीं है। अदालत ने कहा कि महिला बालिग और परिपक्व है। इसी आधार पर यौन संबंध की सहमति दी।