जालसाजों ने टेलीकॉम अधिकारी बनकर ग्रेटर कैलाश-1 के एनआरआई बुजुर्ग डाक्टर दंपति से 14.85 करोड़ रुपये ठग लिए। पुलिस अधिकारी बताकर लगातार फोन व वीडियो कॉल किए, मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया और गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद पैसे की डिमांड की। डर के मारे दंपति ने बात मान ली और बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। साइबर जालसाजों ने एनआरआई डा. इंदिरा तनेजा को इतना डरा दिया कि वह किसी को कुछ कह नहीं पाई। डिजिटल अरेस्टिंग के दौरान साइबर जालसाजों के कहने पर जब वह पीड़िता उनके पैसे ट्रांसफर करने बैंक गई तो बैंक मैनेजर समेत अन्य बैंक कर्मियों को इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करने पर संदेह हुआ। उन्होंने डॉक्टर तनेजा से रकम ट्रांसफर करने को लेकर बहुत पूछा, मगर उन्होंने बैंक कर्मियों को वहीं बताया जो उन्हें जालसाजों ने बताया था।
गिरफ्तारी के डर से बस में किया
पीड़िता इंदिरा तनेजा ने बताया कि 24 दिसंबर को दोपहर में उन्हें एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई का अधिकारी बताया। उसने कहा कि उनके मोबाइल नंबर से आपत्तिजनक कॉल किए गए हैं और कई शिकायतें मिली हैं, इसलिए नंबर बंद किया जाएगा। इसके बाद कॉल करने वाले ने उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया और कहा कि उनके खिलाफ महाराष्ट्र में प्राथमिकी दर्ज हैं और गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं। कॉल को एक वीडियो कॉल में बदला दी, सामने व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखा। उसने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से केनरा बैंक में खाता खुला है, जिसका इस्तेमाल बड़े स्तर की धोखाधड़ी में हुआ है। ये मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। जालसाजों ने कहा कि यदि उन्होंने तुरंत सहयोग नहीं किया तो उन्हें और उनके परिवार को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पति की बीमारी पर नहीं आया रहम
पीड़िता ने ठगों से कहा कि उनके पति एम्स में सर्जरी के बाद रिकवरी में हैं। उनकी मदद करने वाला कोई नहीं है। इसके बावजूद ठगों ने कोई रहम नहीं दिखाया। वह लगातार कॉल और वीडियो कॉल के जरिए दबाव बनाते रहे। उन्हें कहा गया कि जांच के दौरान वे किसी से बात नहीं कर सकते और न ही पुलिस स्टेशन जा सकते हैं। यह सब डिजिटल अरेस्ट की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया। ठगों ने भरोसा दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज, पुलिस जैसी भाषा और डराने वाले आरोपों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि अगर दंपति अपनी बेगुनाही साबित करना चाहते हैं तो उन्हें बताए गए खातों में पैसे ट्रांसफर करने होंगे, ताकि जांच पूरी की जा सके। डर और मानसिक तनाव में आकर दंपति ने अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 14.85 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
2015 में भारत आए थे
दरअसल डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉक्टर इंदिरा तनेजा तकरीबन 48 साल तक अमेरिका में रहकर यूएन में सर्विस की और रिटायर होने के बाद साल 2015 में वापस भारत आ गए। 2015 से डॉक्टर दंपति चैरिटेबल सर्विस से जुड़ गए थे। डिजिटल अरेस्ट के दौरान आठ अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। डॉक्टर इंदिरा तनेजा के द्वारा यह पैसा ट्रांसफर किया गया। डॉक्टर इंदिरा तनेजा के मुताबिक साइबर ठगों ने कभी दो करोड रुपए तो कभी 2 करोड़ 10 लाख रुपए इसी तरह से अलग-अलग अमाउंट ट्रांसफर करने को कहा।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम का हिस्सा
आईएफएसआई के पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम का एक गंभीर हिस्सा है। ठग खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी खातों और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर आरोप लगाते हैं, ताकि पीड़ित घबरा जाए और बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर दे। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती और न ही जांच के नाम पर पैसे मांगती है। अगर किसी को इस तरह का कॉल आए, तो तुरंत कॉल काटें, नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत करें और अपने परिवार या बैंक को जानकारी दें।
निर्णय लेने की क्षमता न खोएं
आरएमएल अस्पताल के मनोचित्सिक लोकेश शेखावत ने कहा है कि डर व घबराहट में निर्णय लेने की क्षमता खत्म हो जाती है। लोग जल्दबाजी में सोच नहीं पाते कि क्या करना है। जालसाज पीड़ित को जल्दबाजी में रखते हैं और दिमाग में इतनी सूचनाएं व सवाल डाल देते हैं कि पीड़ित का दिमाग थम जाता है। ऐसी स्थिति में बिना घबराए निर्णय लेना चाहिए।