प्रदेश भाजपा ने सिख दंगों के मामले में हाईकोर्ट के फैसले के ध्यानार्थ कांग्रेस पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग की है। प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा अदालत ने फैसले में स्पष्ट कहा है कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण से बचाया गया और कोई भी राजनीतिक पार्टी ऐसे कामों में लिप्त होती है तो उसकी मान्यता रद्द होनी चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने कहा इस फैसले से सिख समुदाय को कुछ राहत मिली है, लेकिन जब सभी बड़े नेता जेल में होंगे तभी पूरी राहत मिलेगी।
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संवाददाता सम्मेलन में तिवारी ने कहा यह दंगे नहीं बल्कि नरसंहार था। सज्जन कुमार सहित अन्य नेता अपने प्रभाव से बचते रहे है और अदालत ने जिस प्रकार उन्हें दोषी ठहराते हुए सजा दी है उससे अन्य आरोपियों पर भी तलवार लटक गई है। तिवारी ने कहा किसी भी सभ्य समाज में इस प्रकार की घटनाओं का कोई स्थान नहीं है। तिवारी ने कहा जगदीश टाइटलर पर भी इसी प्रकार के आरोप है और अब विश्वास हुआ है कि उनको भी सजा मिलेगी। उन्होंने कहा कांग्रेस नेता इन घटनाओं में लिप्त थे यह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान से भी स्पष्ट है कि जब बरगद का पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है।
केजरीवाल सरकार ने एसआईटी का नहीं किया था सहयोग : गुप्ता
vijendra gupta
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सज्जन कुमार को सजा सुनाए जाने पर नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने इन मामलों में जांच आगे नहीं बढ़ने दी और केजरीवाल सरकार ने एसआईटी का सहयोग नहीं किया था। मामलों को दबाने की पूरी कोशिश की गई। आम आदमी पार्टी सरकार ने अपनी एसआईटी गठित कर मामले को भ्रमित करने का प्रयास किया था। उसने केन्द्र द्वारा गठित एसआईटी के साथ सहयोग नहीं दिया था। 1984 के दंगों में मारे गए 63 लोगों की फाइल खोने का नाटक भी इसी दिशा में एक प्रयास था। आप पार्टी की कांग्रेस से गठबंधन की इच्छा से सिद्ध हो गया कि उसकी कांग्रेस सरकार से मिलीभगत थी। अब जब कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई तब केजरीवाल व संजय सिंह ने गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए समारोह से किनारा कर लिया।
गुप्ता ने कहा कि केन्द्र में भाजपा सरकार और विशेषकर गृह मंत्री राजनाथ सिंह के निरन्तर प्रयासों से इन मामलों को दोबारा खोला गया और गंभीरतापूर्वक जांच शुरू की गई। इस फैसले से सिखों के कभी न भरने वाले घावों पर कुछ मरहम लगेगी। लेकिन अभी इस दिशा में लंबा सफर तय करना है। जब तक सभी दोषियों को सजा नहीं हो जाती, तब तक सिख समुदाय के लिए सत्य और न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा। कमलनाथ गुरुद्वारा रकाबगंज पर हमला करने के लिए भीड़ को उकसाने का आरोप है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा गठित नानावती कमीशन ने विशेष रूप से हिंसा के मामलों में कमलनाथ को नामित किया था।
केंद्र ने एसआईटी खत्म न की होती तो कई और होते जेल में: संजय सिंह
Sanjay Singh
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आप नेता संजय सिंह ने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार ने अगर दंगा मामले में बनाई गई एसआईटी को खत्म नहीं किया होता तो अब तक कई लोग जेल की हवा खा रहे होते। आप का कहना है कि इस मामले में सबसे हैरान करने वाला रवैया भाजपा की 1998-2004 के बीच के कार्यकाल का रहा है। इस दौरान दंगा पीड़ितों को इंसाफ नहीं दिलाया जा सका।
उधर, दिल्ली में 49 दिन के आप के शासन में एसआईटी गठन के फैसले को तत्कालीन उपराज्यपाल ने रोके रखा। जबकि दूसरी बार 2015 में दिल्ली में आप की सरकार बनने से पहले केंद्र सरकार ने जल्दबाजी में एसआईटी गठित कर दी।
केजरीवाल ने किया फैसले का स्वागत, कहा- दंगों से जुड़े सभी मामलों का जल्द हो निपटारा
arvind kejriwal
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1984 सिख दंगों को आजादी के बाद का राज्य प्रायोजित सबसे बड़ा दंगा करार देते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी ने सोमवार को हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, पार्टी का कहना है कि दंगा पीड़ितों को इंसाफ मिलने में काफी देर हुए है। साथ ही अदालत से अपील की है कि सिख दंगों से जुड़े सभी लंबित मामलों को जल्द से जल्द निपटाया जाए।
केजरीवाल ने कहा कि फैसला दंगा पीड़ितों के लंबे कष्टदायक इंतजार के बाद आया है, जिनके परिजनों की हत्या उस वक्त के सत्ता पर काबिज लोगों ने की थी। कोई कितना भी ताकतवर हो, दंगों में हाथ होने पर उसे नहीं बख्शा जाना चाहिए। आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि अब बाकी मामलों में भी पीड़ितों को जल्द इंसाफ मिलना चाहिए। न्याय में देरी अन्याय के समान है।
कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सजा मिलने के बाद सिखों को न्याय मिला है। अब नरसंहार के सूत्रधार भी नहीं बच सकेंगे। ये कहना है विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेन्द्र जैन का। उन्होंने कहा कि अभी भी इस घटना के मुख्य दोषी कानून से बचे हुए हैं। यह तो अभी शुरुआत है, न्याय का बाकी हिस्सा तो अभी शेष है। इस नरसंहार के सभी दोषी पकड़े जाएंगे और उन्हें कठोरतम सजा दी जाएगी। उन्होंने ये भी कहा कि उस समय के सत्ता के शिखर पर बैठे कांग्रेसी नेता इस बर्बर नरसंहार के सूत्रधार थे। इन नेताओं को फांसी पर चढ़ाने के बाद ही सिख समुदाय को राहत मिलेगी।