कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी को यह तनिक भी आभास नहीं होगा कि जिस स्थान पर उन्होंने किसानों की लड़ाई लड़ी, उसी जगह से उन्हें धोखा मिलेगा।
दरअसल, 2011 में भट्टा पारसौल किसान आंदोलन हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया था कि प्रशासन और किसान आमने-सामने हो गए और गोलीबारी में दो किसान और एक पुलिस वाला मारा गया।
कई किसान और अधिकारी घायल हो गए। इसकी भनक जब राहुल गांधी को लगी तो उन्होंने सबसे पहले गांव में पहुंचकर किसानों के साथ हुए अत्याचार की आवाज उठाई और उनके जाने से राष्ट्रीय स्तर पर किसानों का दर्द पहुंचा।
कहीं का नहीं छोड़ा
चूंकि किसानों की बात थी, लिहाजा राहुल ने इस मुद्दे को उठाया और वादा किया कि वह जमीन अधिग्रहण के पुराने कानून को बदल देंगे।
उस वक्त विधान सभा और आगामी लोक सभा के चुनाव का मामला था, लिहाजा उन्होंने कानून को बदला। इसका कुछ फायदा विधान सभा के चुनाव में मिला था।
लोकसभा की तैयारी चल रही थी और रमेश चंद्र तोमर को टिकट देकर राहुल गांधी ने दोबारा विश्वास किया था लेकिन तोमर कांग्रेस की फजीहत कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
... तो नहीं होता धोखा?
दरअसल, गौतमबुद्ध नगर सीट से कई नेताओं ने टिकट मांगा था, लेकिन वह नाकाम रहे और रमेश चंद्र तोमर दोबारा टिकट लेने में कामयाब रहे।
साल 2011 में हुए भट्टा-पारसौल कांड में जैसे ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आए तो कांग्रेसियों की नजर गौतमबुद्ध नगर सीट पर गड़ गई।
कांग्रेस के कई नेताओं ने मजबूती से दावेदारी ठोकी। दूसरे शब्दों में कहें तो उन नेताओं ने लोकसभा चुनाव लड़ने के हिसाब से क्षेत्र में तैयारी भी की थी, लेकिन रमेश चंद तोमर ने सभी नेताओं का गणित बिगाड़ कर रख दिया।