भाजपा के तमाम दिग्गज नेताओं और स्टार प्रचारकों के चुनावी जंग में उतरने का पार्टी को फायदा मिल सकता है तो कांग्रेस भी सीएए के मुद्दे पर हासिल समर्थन को अपनी बढ़त बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। सीएए मुद्दे पर तीनों प्रमुख पार्टियां अपने-अपने तरीके से विपक्षियों पर निशाना साध रही हैं, ताकि अधिक से अधिक वोटरों का समर्थन मिल सके। आप के स्टार प्रचारक भी मैदान में हैं तो कांग्रेस एक फरवरी से 100 से अधिक विधायकों और स्टार प्रचारकों के साथ प्रचार में उतरने की तैयारी में है।
2015 के विधानसभा चुनाव में मिले वोट
आप : 54.3
भाजपा : 32.3
कांग्रेस : 9.7
2019 लोकसभा चुनाव में मिले वोट
भाजपा : 56.6
कांग्रेस : 22.5
आप :18.1
2019 के चुनाव में 70 विधानसभा सीटों की स्थिति
पार्टी पहले दूसरे तीसरे
भाजपा 65 05 00
कांग्रेस 05 42 23
आप 00 23 47
नोट : आंकड़े चुनाव कार्यालय के मुताबिक दिए गए हैं।
शाहीन बाग मामले पर कांग्रेस ने भाजपा और आप को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस ने कहा कि दोनों पार्टियां इस मुद्दे को तूल देकर मतों का ध्रुवीकरण करना चाहती हैं। इसके जरिए दिल्लीवासियों का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस उनके नापाक इरादों को पूरा नहीं होने देगी।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने बुधवार को कालकाजी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार शिवानी चोपड़ा के प्रचार अभियान के दौरान मीडिया से बातचीत की। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में लचर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, टूटी सड़कें, बढ़ता प्रदूषण और अपराध के अलावा गंदे पानी की जलापूर्ति समेत कई ज्वलंत मुद्दे हैं, लेकिन दोनों पार्टियां मतदाताओं को भ्रमित करने का प्रयास कर रही हैं।
शाहीन बाग मुद्दा काफी संवेदनशील है, परंतु केंद्र और दिल्ली सरकार इसके प्रति पूरी तरह असंवेदनशील हैं। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है। सीएए और एनआरसी के मसले पर भी प्रतीकात्मक विरोध ही हो रहा है। बच्चे, बुजुर्ग और यहां तक की महिलाएं भी धरने पर बैठी हुई हैं, लेकिन हैरत की बात है कि सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है।