प्रार्थना सभा की तैयारियों और आगामी रणनीति पर चर्चा के लिए बैठक में तीनों कार्यकारी अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर, पूर्व सांसद रमेश कुमार, दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री मंगत राम सिंघल, रमाकांत गोस्वामी को छोड़ कम ही दिग्गज पहुंचे।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि प्रदेश का नेतृत्व बदलने के साथ ही गुटबाजी बढ़ जाती है। यह भी देखा गया कि जैसे ही शीला दीक्षित को कमान सौंपी गई, अन्य नेताओं ने प्रदेश कार्यालय से दूरी बना ली थी। यहां तक कि प्रदेश प्रभारी पीसी चाको भी शीला दीक्षित के फैसले को स्वीकार करने को राजी नहीं थे।
कई बार उन्होंने पत्र लिखकर भी दीक्षित के निर्णय में हस्तक्षेप किया। लोकसभा चुनाव के दौरान भी यही दिखा था। चुनाव पार्टी नहीं लड़ रही थी, बल्कि प्रत्याशी अपने दमखम पर लड़ रहे थे। बैठक के बाद पूर्व मंत्री रमाकांत गोस्वामी ने बताया कि बैठक में शीला दीक्षित के अधूरे कामों को पूरा करने पर चर्चा हुई।