राजधानी में राष्ट्रपति शासन अभी चलता रहेगा या नई सरकार बनेगी? विधायक सभी कह रहे हैं कि सरकार बननी चाहिए लेकिन पार्टी स्तर पर फॉर्मूला तैयार करने या बताने की स्थिति में कोई नहीं है।
उपराज्यपाल नजीब जंग ने राजनीतिक हालात और विकल्प वाली चिट्ठी राष्ट्रपति को भेज दी है लेकिन निर्णय केन्द्र सरकार के हाथ में हैं। मसलन भाजपा को जो सूट करेगा, वही फैसला होने की उम्मीद है।
उम्मीद है कि सोमवार तक सब कुछ साफ हो जाएगा। कांग्रेस के नेता इसे 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले जवाब की कवायद से जोड़कर देख रहे हैं। दिल्ली के राजनीतिक विश्लेषक और संवैधानिक विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं लेकिन उस सत्तारूपी समुद्र के मंथन से अभी तक कोई सेट फार्मूला सामने नहीं आया है।
सूत्र बताते हैं कि भाजपा के अलावा आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेता भी कुछ फार्मूले पर काम कर रहे हैं। तर्क है कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। फिर कांग्रेस में भी विधायक कई बार यह कह चुके हैं कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकेंगे। ऐसे में आप और कांग्रेस एक ऐसे नाम को भी मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करने पर मंथन कर रहे हैं जो सबको सूट करता हो।