आप कांग्रेस गठबंधन पर दो दिनों में हो सकता है एलान
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कांग्रेस-आप के बीच संभावित गठबंधन के कयासों से कांग्रेस व आप के कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि नेता भी भ्रमित है। वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि लोकसभा चुनावों के लिए अपने प्रचार शुरू करे या नहीं। प्रचार शुरू करे तो किस पार्टी के लिए वोट मांगे।
आप व कांग्रेस के स्थानीय नेता प्रचार को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। दरअसल कांग्रेस के इंकार करने के बाद साफ हो गया था कि अब गठबंधन नहीं होगा और दोनों ही पार्टियों के नेता व कार्यकर्ता प्रचार के लिए कमर कस ही रहे थे कि कांग्रेस की और से गठबंधन को लेकर सर्वे करवाने की बात सामने आ गई। उधर आप के नेताओं के भी बयान आ गए कि चुनावी गठबंधन हो भी सकता है।
ऐसे में दोनों ही पार्टियों के नेता फिर भ्रमित हो गए कि वे प्रचार में विरोधी पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करें या नहीं। वे अपनी विरोधी पार्टी के खिलाफ बयान देते हैं तो कुछ ही दिनों में गठबंधन होने पर फिर उसी पार्टी के लिए किस मुंह से मतदाताओं के समक्ष वोट मांगने जाएंगे।
दरअसल कांग्रेस-आप की मजबूरी है गठबंधन। दोनों ही पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि गठबंधन न होने पर एक तरह से लोकसभा की सातों सीटे थाली में परोस कर भाजपा को देना है। सातों साटों पर भाजपा की जीत तय है और कांग्रेस व आप के बीच लड़ाई दूसरे व तीसरे नंबर की रह जाएगी।
ऐसे में इन नेताओं को मानना है कि भाजपा को रोकना है तो मन मारकर भी गठबंधन करना ही होगा। यही कारण है कि आप ने भले ही अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए है लेकिन कांग्रेस की और से अभी प्रत्याशियों के नाम खुलकर सामने नहीं आए हैं।