कमेटी ने मुख्य सचिव पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुये इस पर आपत्ति जाहिर की है। साथ ही चुनौती भी दी है कि अगर अंशु प्रकाश अपने हलफनामे में दी गई बातों में कोई बदलाव नहीं किया तो उनका झूठ पकड़ा जाएगा।
कमेटी के मुताबिक, यह रिकॉर्ड पर है कि अंशु प्रकाश 16 फरवरी को समिति के सामने उपस्थित हुये थे। उस वक्त उन्होंने कहा था कि पूर्व व मौजूदा रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटी के बैठक में नहीं हैं।
ऐसे में उनको समय दिया जाये। समिति ने मुख्य सचिव को समय भी दिया। लेकिन इसके बाद से वह लगातार आनाकानी कर रहे हैं। वहीं, आरसीएस कहना है कि वह मुख्य सचिव का आदेश न मिलने तक वह बैठक में शामिल नहीं होंगे।
कमेटी का कहना है कि मुख्य सचिव अपने साथ हुयी कथित मारपीट के बारे में पुलिस को दी गयी शिकायत का उपयोग सहकारी बैंक घोटाले से ध्यान हटाने के लिए एक ढाल के रूप में कर रहे हैं। समिति की कार्रवाई का सरकार के कार्यकारी निर्णय से कोई लेना देना नहीं है। विधानसभा समिति की कार्यवाही पूरी तरह से भिन्न और एक अलग मामले से संबंधित है।