कार्यकारिणी उपाध्यक्ष चुनाव में एकजुट हुआ विपक्ष अब महापौर के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। विपक्षी दलों के पार्षद अब महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं।
दरअसल, सपा, बसपा, कांग्रेसी पार्षद कार्यकारिणी समिति के उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान रहे महापौर के रवैये से नाराज हैं। उनका कहना है कि मेयर ने बीते साल यह पद विपक्ष को देने का वादा करने के बाद खिलाफत कर दी।
कांग्रेस पार्षद दल के नेता राजीव भाटी का कहना है कि भाजपा द्वारा दूसरे दलों के पार्षदों के वार्डों में ज्यादा विकास कार्य कराने का प्रलोभन देकर तोड़ा जा रहा है। जबकि महापौर को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी पार्षदों से एक समान व्यवहार करना चाहिए।
राजीव भाटी का कहना है कि अगली बोर्ड बैठक से पहले विपक्ष के पार्षदों की बैठक कर अविश्वास प्रस्ताव लाने पर सहमति बनाई जाएगी। निगम कार्यकारिणी समिति के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष आदिल मलिक का कहना है कि बसपा सदन में महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी।
भाजपा संगठन की वजह से बढ़ी महापौर की मुश्किलें
मेयर ने पूर्व में विपक्षी दलों को उपाध्यक्ष पद देने पर हामी तो भर ली, लेकिन संगठन के सामने इस बार महापौर की एक न चली। संगठन ने कांग्रेस से भाजपा में आए पार्षद प्रवीन चौधरी को उपाध्यक्ष पद का प्रत्याशी बना दिया।
ऐसे में अब विपक्षी पार्षद मेयर के खिलाफ हो गए। नगर निगम में भाजपा बहुमत में नहीं है। ऐसे में सदन चलाने में अब मेयर को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।