नई दिल्ली । जामिया मिल्लिया इस्लामिया में समकालीन अरब-इस्लामिक संस्कृति के भविष्य पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। इसमें 25 से अधिक विद्वानों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने अरब-इस्लामिक संस्कृति के बदलते स्वरूप पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जामिया रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिजवी थे।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह संबंध प्राचीन व्यापारिक संपर्कों से लेकर आधुनिक कूटनीतिक सहयोग तक विकसित हुआ है। मुख्य वक्ता प्रो. मुजीबर उर रहमान ने कहा कि अरब-इस्लामिक संस्कृति हमेशा से गतिशील और ज्ञान-आधारित रही है। समकालीन चुनौतियों का सामना करने के लिए शास्त्रीय परंपराओं के पुनर्पाठ की आवश्यकता है। ब्यूरो