दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर के डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी देने का प्रस्ताव जल्द दिल्ली कैबिनेट में आएगा। इस 92.05 किलोमीटर के कॉरिडोर में से 9.7 किलोमीटर दिल्ली में तैयार होना है और यूपी में 89.64 किलोमीटर है। कॉरिडोर निर्माण में 21,902 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान, जिसमें दिल्ली को 1074.24 करोड़ रुपये देने हैं।
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली सरकार केंद्रीय करों की भरपाई और वैट की जगह 1 जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी में छूट को लेकर कुछ उलझन में है। प्रस्ताव विभागों के पास राय के लिए भेजा गया है। विभागों की राय को शामिल करके फाइनल प्रस्ताव बनाया जाएगा। केंद्रीय करों के बदले भरपाई का मामला भी दिल्ली मेट्रो फेज-4 की तरह फंस गया है। दिल्ली सरकार इसकी भरपाई नहीं करना चाहती है। आरआरटीएस में 213 करोड़ रुपये की भरपाई केंद्रीय कारों के बदले करनी है।
यूपी कैबिनेट नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) की तरफ से भेजे गए डीपीआर को पहले ही मंजूरी दे चुकी है। पहले चरण में आरआरटीएस का कॉरिडोर साहिबाबाद से मेरठ के बीच 38.05 किलोमीटर का तैयार होना है।
कॉरिडोर तैयार होने पर दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ की दूरी महज 62 मिनट में पूरी होगी। वहीं, अभी लोकल ट्रेन से 2 घंटे और सड़क के रास्ते पहुंचने में 3-4 घंटे का समय लगता है। कॉरिडोर पर दैनिक 7.42 लाख यात्रियों की यात्रा का अनुमान 2021 के लिए लगाया गया है।
दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में आरआरटीएस के लिए कोई बजट नहीं रखा है। यही वजह है कि अगर कैबिनेट आरआरटीएस के डीपीआर को मंजूरी देती है, तो संशोधित बजट अनुमान में इसके लिए राशि का प्रावधान करना होगा। इसी तरह एक अन्य तरह का खर्च एनसीआरटीसी ने 5 फीसदी कहा है, जबकि दिल्ली सरकार 1 फीसदी चाहती है।