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बढ़ सकती हैं स्मृति की मुश्किलें

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मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की योग्यता को लेकर उठा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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चुनावों में हलफनामों में अलग-अलग जानकारी देने के आरोप में स्मृति ईरानी के खिलाफ दिल्ली के पार्लियामेंट हाउस पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है।

स्मृति ईरानी की योग्यता को लेकर उठे विवाद में इस शिकायत के बाद एक नया मोड़ आ गया है। क्योंकि अभी तक इस मुद्दे पर सिर्फ जुबानी जंग और आरोप-प्रत्यारोप ही जारी थे।

किसने दर्ज कराई शिकायत

एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली सोशल एक्टिविस्ट और आम आदमी पार्टी की पूर्व नेता टीना शर्मा ने की है।

इसमें स्मृति के खिलाफ आईपीसी की धारा-177, 181, 467 और 468 के तहत एफआईआर दर्ज करने की गुजारिश की गई है।

सोशल एक्टिविस्ट टीना ने कहा कि इस मामले में सारी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है, इसलिए दिल्ली पुलिस को इस शिकायत को एफआईआर में कन्वर्ट कर देना चाहिए।

इस आग में कोई नहीं कूदना चाहता

टीना ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि यदि थाना पुलिस इस मामले में स्मृति ईरानी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करती तो वह सभी दस्तावेजों के साथ दिल्ली पुलिस के कमिश्नर, उपराज्यपाल और चुनाव आयोग से भी शिकायत करेंगी।

यही नहीं, उन्होंने इस बात की भी चेतावनी दी कि इस मामले में यदि उन्हें कोर्ट भी जाना पड़े तो वह जाएंगी और हरहाल में स्मृति के खिलाफ मामला दर्ज करा कर रहेंगी।

इस मामले में टीना ने कई वकीलों से भी संपर्क किया है लेकिन मामला हाईप्रोफाइल होने के चलते कोई भी वकील सरकार से मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता।

'बीजेपी ने ही खोली स्मृति की पोल'

सोशल एक्टिविस्ट टीना ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्मृति ईरानी के गॉडफादर हैं और इसी का इनाम उन्हें एचआरडी मिनिस्टर के तौर पर मिला है।

टीना ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी की महिला नेताओं ने ही स्मृति की पोल खोली है। स्मृति को मंत्री बनाए जाने से नाराज महिला नेताओं ने स्मृति की योग्यता से जुड़ी जानकारियां दूसरों को बताईं।

चुनाव आयोग सामने तीन अलग-अलग हलफनामे पेश करने के मामले में एचआरडी मिनिस्टर को मुसीबत झेलनी पड़ सकती है। बता दें कि स्मृति ईरानी ने 2004,2011 और 2014 में दाखिल हलफनामों में अलग-अलग जानकारी दी थी।

ये है पूरा केस

दरअसल स्मृति ईरानी की योग्यता का मुद्दा उठाने के बजाय उनके विरोधियों को इस बात पर सवाल खड़े करने चाहिए कि तीन चुनावों में उन्होंने अलग-अलग शपथ पत्र कैसे दिए।

2004 में स्मृति ईरानी ने चांदनी चौक से कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा था और हार का सामना करना पड़ा। 2011 में स्मृति गुजरात से राज्यसभा सासंद बनीं।

2014 में वह अमेठी से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरीं लेकिन यहां भी हार गईं। इसके बावजूद उन्हें मोदी सरकार में एचआरडी मिनिस्टर जैसा अहम पद दिया गया है।
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हो सकती है 6 माह ही जेल

2011 में राज्यसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने नामांकन पत्र जो हलफनामा दाखिल किया था,उसमें उन्होंने बताया था कि 1994 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ करेस्पोंडेंस से उन्होंने बीकॉम फर्स्ट ईयर की पढ़ाई की थी।

2004 के लोकसभा चुनाव में दाखिल हलफनामे में स्मृति ईरानी ने बताया था कि वे बीए पास हैं। 1996 में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए (पत्रचार से) किया था लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बताया कि वे बीकॉम फर्स्ट ईयर पास हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक स्मृति ईरानी को गलत शपथ पत्र भरने के कारण छह महीने की जेल हो सकती है। इसके लिए कोई समय सीमा नहीं है।  अगर स्मृति ईरानी को छह महीने की जेल होती है तो भी अन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। वे सांसद बनी रहेंगी। हालांकि विशेषाधिकार के चलते इस मामले में कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।
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