हर दो किलोमीटर पर थम रही रफ्तार
सुबह करीब नौ बजे से लेकर दोपहर तक और फिर शाम पांच बजे के बाद इस मार्ग पर वाहनों का दबाव तेजी से बढ़ जाता है। डेरा अंडरपास से आगे बढ़ते ही कई स्थानों पर वाहन रेंगते नजर आते हैं। अर्जन गढ़, राजपुर चौक, फतेहपुर बेरी, सतबड़ी, राजपुर खुर्द एक्सटेंशन और डॉ. आंबेडकर कॉलोनी जैसे इलाकों में गाड़ियों की लंबी कतारें आम दृश्य हैं। सबसे ज्यादा परेशानी असोला फतेहपुर बेरी, राजपुर खुर्द गांव और डॉ. आंबेडकर कॉलोनी से छतरपुर मेट्रो स्टेशन तक देखने को मिलती है। इनमें भी डॉ. आंबेडकर कॉलोनी से मेट्रो स्टेशन तक करीब एक किलोमीटर लंबा जाम रोज की तस्वीर बन चुका है।
रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा असर
स्थानीय निवासी ऋषिपाल ने बताया कि पहले घर से निकलने के आधे घंटे बाद मेट्रो स्टेशन पहुंच जाते थे। अब एक घंटा पहले निकलना पड़ता है। फिर भी समय पर पहुंचने की कोई गारंटी नहीं रहती। राजपुर खुर्द की छात्रा नैना ने बताया कि कॉलेज जाने का यही मुख्य रास्ता है। कई बार जाम के कारण पहली क्लास छूट जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी परीक्षा वाले दिनों में होती है। वहीं, सतबड़ी के दुकानदार कमल ने बताया कि जाम की वजह से ग्राहक भी परेशान रहते हैं। कई लोग दुकान तक पहुंचने से पहले ही वापस लौट जाते हैं। इससे कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, अगर किसी मरीज को अस्पताल ले जाना हो तो सबसे ज्यादा डर इसी सड़क का लगता है। एंबुलेंस भी कई बार जाम में फंस जाती है।