सिविल अस्पताल में नवजात की मौत को लेकर मंगलवार को परिजनों ने जमकर हंगामा किया। इससे अफरातफरी मच गई। हंगामे को देखते हुए महिला वार्ड की स्टाफ नर्स और आशा वर्कर वहां से खिसक गईं। परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। इससे पहले भी जनवरी और मार्च महीने में एक-एक नवजात की मृत्यु हो चुकी है। उधर, कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप शर्मा ने नाल टूट जाने के कारण बच्चे की मृत्यु की संभावना जताई है। परिजनों की शिकायत पर डॉक्टरों से जानकारी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि कमेटी गठित कर घटना की जांच की जाएगी।
खांडसा रोड निवासी योगेश ने पत्नी विनिता (23) को सोमवार दोपहर तीन बजे भर्ती कराया था। योगेश का आरोप है कि भर्ती कराने के बाद न तो किसी डॉक्टर ने जांच की और न ही किसी स्टाफ नर्स द्वारा उनकी देखभाल की गई। इलाज शुरू न करने के कारण महिला की तबीयत खराब होती चली गई।
बार-बार पूछने पर हालत सामान्य बताया गया। एक नर्स ने मंगलवार को ओपीडी के समय डॉक्टर के दिखवाने की बात कही। जब हालत काफी बिगड़ गई तो करीब 12 बजे उसे ऑपरेशन थियेटर मेें लाया गया। जहां ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
परिजनों का आरोप है कि विनिता का ऑपरेशन समय से पहले हो गया होता तो मां और बच्चे दोनों ही स्वस्थ रहते। ऑपरेशन में देरी होने और डॉक्टर के समय पर नहीं पहुंचने के कारण बच्चे की मौत हो गई। इसकी वजह से गुस्साए परिजनों ने जमकर महिला वार्ड में हंगामा किया और डॉक्टरों को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। डॉक्टरों के मुताबिक सामान्य डिलीवरी के दौरान बच्चे की जगह पहले नाल बाहर आ गई। इस कारण ऑपरेशन करना पड़ा। जब तक बच्चे को बाहर निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।