राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न रिहायशी क्षेत्रों में चल रही करीब 52 हजार औद्योगिक ईकाइयों की जांच और उन पर जुर्माने की राशि तय करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व जज की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। पीठ ने कहा कि गठित समिति दो हफ्तों में अपना कामकाज शुरू करेगी।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वत: संज्ञान मामले में यह आदेश दिया है। वहीं, पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी संरचना विकास निगम, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, नगर निगम को ऐसे अधिकारियों को पैनल में नामित करने का आदेश दिया है जो अतिरिक्त कार्य के साथ इस काम में भी समय दे सकें। पीठ ने कहा कि संबंधित समिति न सिर्फ पर्यावरणीय क्षति का आकलन करेगी बल्कि कार्य योजना भी तैयार करेगी।
डीएसआईडीसीसी की रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लिया था। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी दिल्ली में मोती नगर, कीर्ति नगर, रमेश नगर, नजफगढ़ और मानसरोवर गार्डेन में अवैध ईकाइयां मौजूद हैं। वहीं, दक्षिणी दिल्ली के तहत आश्रम, भोगल, जंगपुरा, महारानी बाग और महिपालपुर साथ ही पूर्वी दिल्ली में गांधी नगर, झील, शास्त्री नगर, कैलाश नगर, जाफराबाद और शहादरा में भी अवैध ईकाइयां मौजूद हैं, जबकि उत्तरी दिल्ली में सदर बाजार, चांदनी चौक, मलकागंज, बल्लीमारान, लाल कुंआ कश्मीरी गेट के आस-पास अवैध ईकाइयों की बात कही गई है।
इसके अलावा अवैध ईकाइयों के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में करोल बाग, पटेल नगर, आनंद पर्बत, रोहतक रोड, राजिंदर नगर, पुराना राजिंदर नगर, शहादरा, जीटी रोड, बदरपुर, विश्वास नगर, बुराड़ी और जगतपुरी शामिल हैं।