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Rekha Gupta: सीएम को जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, 22-25 जवान और कमांडो हर समय रहते तैनात; फिर भी हुई चूक?

Wed, 20 Aug 2025 10:53 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

दिल्ली की सीएम को जेड श्रेणी की सुरक्षा मिलती है। इसमें 22 से 25 जवान और कमांडो हर समय तैनात रहते हैं। सभी जवानों के पास एमपी-5 मशीन गन के अलावा ग्लॉक पिस्टल व 9 एमएम की पिस्टल होती हैं। इसके बावजूद उन पर हमला हो गया, जिसे सुरक्षा में भारी चूक माना जा रहा है।
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दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता और हमले का आरोपी राजेश खिमजी। - फोटो : पीटीआई/ANI
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विस्तार
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को जून में जान से मारने की धमकी मिली थी। गाजियाबाद कंट्रोल रूम में एक युवक ने कॉल कर धमकी दी थी। उस समय स्थानीय पुलिस ने दिल्ली पुलिस को सूचना दे दी थी। बाद में यूपी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। अब बुधवार को सीएम पर हुए हमले को सुरक्षा में भारी चूक माना जा रहा है।

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दिल्ली की सीएम को जेड श्रेणी की सुरक्षा मिलती है। इसमें 22 से 25 जवान और कमांडो हर समय तैनात रहते हैं। सभी जवानों के पास एमपी-5 मशीन गन के अलावा ग्लॉक पिस्टल व 9 एमएम की पिस्टल होती हैं। यह सारे जवान नजदीकी सुरक्षा प्रदान करते हैं। अन्य जवानों की तैनाती एस्कॉर्ट ड्यूटी, पायलट कार, शैडो कमांडो, स्थायी पिकेट पर रहती है। 24 घंटे सीएम आवास के आसपास जवानों की घेराबंदी रहती है। इसके अलावा सीएम हाउस में हर आने-जाने वाले व्यक्ति की सघन तलाशी ली जाती है।

मल्टीलेयर सुरक्षा प्रदान की जाती है

सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मल्टीलेयर सुरक्षा प्रदान की जाती है। पहला सुरक्षा घेरा इनर कोर्डन का होता है जिसमें दो से तीन जवान सीएम के नजदीक रहकर सुरक्षा घेरा देते हैं। इनके पास हथियारों के अलावा वायरलैस सेट भी रहता है। दूसरा घेरा मिडिल कोर्डन का होता है। इसके तहत चार से छह जवान सीएम से थोड़ी दूर पर रहते हैं।

इन जवानों का काम भीड़ को नियंत्रित करना होता है। इसके अलावा यह संदिग्ध लोगों पर नजर भी रखते हैं। तीसरे घेरे में मुख्यमंत्री के लिए आउटर कोर्डन के तहत 13 कमांडो सुरक्षा में रहते हैं। इनका काम भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक कंट्रोल, प्रवेश-निकास को देखना होता है। मुख्यमंत्री का काफिला जब रास्ते में होता है तो लोकल पुलिस रास्ता साफ करवाती है।
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मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी सुरक्षा का कड़ा पहरा रहता है। 24 घंटे पिकेट के अलावा यहां एक्सरे स्कैनर, मेटल डिटेक्टर, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी के लिए पुलिस की टीम अलग तैनात रहती है। इसके अलावा पीसीआर की गाड़ी के अलावा लोकल पुलिस लगातार वहां पेट्रोलिंग करती रहती है।

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