सेफ्टी जांच के दौरान सेफ्टी कमिश्नर को 1551 क्रैक दिखे। वहीं, 149 गर्डर को ठीक से डिजाइन नहीं किया गया था। सेफ्टी कमिश्नर ने मेट्रो चलाने की इजाजत तभी दी, जब स्पीड 120 से घटाकर 50 कर दी गई। इससे मेट्रो निर्माण का मूल मकसद ही खत्म हो गया। उन्होंने बताया कि नुकसान होने की दलील देते हुए रिलायंस के मेट्रो संचालन से हटने पर विवाद निपटारा समिति ने 5000 करोड़ रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है।
मनीष सिसोदिया ने बताया कि अगर डीएमआरसी को भुगतान करना पड़ा तो वह किराया बढ़ाकर इसे दिल्ली वालों से वसूलेगी। ऐसी हालत में मुख्यमंत्री ने दो मंत्रियों को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। साथ ही कहा कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसी से इसकी भरपाई भी की जाए।