केजरीवाल का आरोप, नई दिल्ली में बड़े पैमाने पर कटे वोट, जोड़े गए नाम
दिल्ली में विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले वोट काटने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर से नई दिल्ली में बड़े पैमाने पर वोट काटने और जोड़ने का मुद्दा उठाया। वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने इसी मसले के लिए मुख्य निवार्चन अधिकारी से मिलने और सबूत पेश करने के लिए समय मांगा है।
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नई दिल्ली विधानसभा में वोटरों के नाम जोड़ने और काटने के बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हो रही है। वहीं, सीएम आतिशी ने दावा किया कि नई दिल्ली में समरी रिवीजन के बाद 15 दिसंबर से 02 जनवरी तक 10,500 नए नाम जोड़ने और 6,167 वोट काटने के आवेदन आए हैं। मात्र 84 लोगों ने 4,283 वोट काटने के आवेदन दिए, लेकिन चुनाव आयोग में सुनवाई के दौरान कई आपत्तिकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने कोई आवेदन नहीं किया है।
सोमवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर आतिशी ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने देश का संविधान लिखते वक्त हर भारतवासी के लिए एक सपना देखा था कि हम जिसे वोट डालेंगे, उस वोट के अधिकार के आधार पर प्रतिनिधि और सरकारें चुनी जाएंगी। वोट का अधिकार हमारे देश के लोकतंत्र और संविधान का मौलिक अधिकार है। जो एक आम व्यक्ति अपने प्रतिनिधि को चुनने के लिए वोट डालता है। भाजपा उस वोट के अधिकार को छीन रही है। नई दिल्ली विधानसभा में तकरीबन एक लाख वोटर हैं। यहां 15 दिसंबर और 2 जनवरी के बीच में 10,500 वोटर्स को जोड़ने के आवेदन आ गए।
वहीं 29 अक्टूबर और 2 जनवरी के बीच में 6167 वोटर डिलीट करने के आवेदन आए। ये कौन लोग हैं चुनाव आयोग इन्हें ढूंढ नहीं पाया। लेकिन इन 84 लोगों ने वोट काटने के लिए ऐसे हजारों लोग ढूंढ लिए। इन 84 लोगों को नोटिस देकर चुनाव आयोग, ईआरओ ने सुनवाई के लिए बुुलाया। तब इन्होंने कहा कि कोई आवेदन ही नहीं किया।
खुद भुक्तभोगी हूं
संजय सिंह ने कहा कि खुद इसका भुक्तभोगी हूं। मेरी पत्नी अनीता सिंह का वोट कटवाने के लिए मधू नाम की इन्हीं महिला के नाम से एप्लीकेशन दी गई और जब उनके पास लोग पहुंचे और उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि हमें तो इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। वहीं सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि हम नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के चुनाव अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं और उनसे संवाद करते आए हैं। पिछले एक हफ्ते के भीतर जो चीजें उजागर हुईं, उन्हें सभी के सामने रखी गईं।
नई दिल्ली में सौ फीसदी ऑबजेक्टर वेरिफिकेशन की जरूरत है। लेकिन आरओ ऑफिस, ईआरओ और तमाम अधिकारियों ने हमारी इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके अलावा चुनाव अधिकारी के दफ्तर में बैठक की मांग रखी। ऐसा नहीं हो सकता तो टेलीफोनिक वेरिफिकेशन करा लीजिए। हमने यह सारे दस्तावेज मुख्य चुनाव आयुक्त को भी एक पत्र के माध्यम से भेजे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि उनका कार्यालय इस पर जरूर संझान लेगा और जल्द से जल्द से कार्रवाई करेगा।