दिल्ली के सातवें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने शासन प्रशासन को दुरुस्त रखने की बड़ी चुनौती होगी। दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है, लेकिन राजधानी की जनता को सुरक्षित रखने के लिए दिल्ली सरकार भी उतनी ही जिम्मेदार है।
गत वर्ष दिसंबर में वसंत विहार में हुए गैंगरेप की घटना ने दिल्ली के नागरिकों को झकझोर कर रख दिया। इस घटना के बाद राजधानी को सुरक्षित रखने के लिए सरकार की ओर से पहल भी की गई, लेकिन आज भी लोगों को खासकर महिलाओं को रात में दिल्ली की सड़कों पर बेखौफ होकर निकलने में डर लगता है।
भले ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुरक्षा लेने से मना कर दिया है, लेकिन दिल्लीवासियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था अहम मसला है। ऐसे में यहां पर केजरीवाल की कड़ी परीक्षा होगी।
केजरीवाल सरकार से लोगों की अपेक्षा है कि वह राजधानी के आम लोगों की सुरक्षा के लिए पहल करेगी और लोग बेखौफ होकर राजधानी की सड़कों पर निकल सकेंगे। सड़कों पर होने वाले क्राइम को लेकर दिल्ली पुलिस कितनी संवेदनशील है, यह बात किसी से छुपी नहीं हुई है।
कोई भी व्यक्ति चोरी और झपटमारी की शिकायत लेकर थाने पहुंचता है तो पुलिसकर्मी उन्हें कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाने की बात कहकर इतना डरा देते हैं कि वह एफआईआर लिखाने के बदले एनसीआर करवाकर घर लौट जाते हैं। खास बात ये है कि एनसीआर के लिए भी आम आदमी से रकम वसूली जाती है।
ऐसा ही कुछ हाल दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी है। बारिश के दिनों में सड़कों पर पानी भर जाने के बाद लगने वाले जाम को लेकर दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार की खींचतान किसी ने छुपी नहीं है। ऐसे में दिल्ली सरकार की क्या पहल होगी, जिससे दिल्ली की जनता को राहत मिल सके।
दर्ज नहीं होतीएफआईआर
दिल्ली पुलिस का दावा है कि वह हर हाल में लोगों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करती है। लेकिन आज भी चोरी और झपटमारी के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होती या फिर लेटलतीफी की जाती है।
लोगों का आरोप है कि पुलिस इन मामलों में पीड़ित के थाने पहुंचने पर उन्हें कोर्ट कचहरी का डर दिखाती है। जब पीड़ित इन सब के बावजूद अपनी शिकायत दर्ज करवाने पर अटल रहता है तो पुलिस उनकी शिकायत ले लेती है। कुछ तो पुलिस की डर से ही खुद को पीछे कर लेते हैं और झपटमारी और चोरी के मामले में एनसीआर करवाकर घर लौट जाते हैं।
रात का खौफ बरकरार
वसंत विहार गैंग रेप की घटना के बाद कुछ दिनों तक पुलिस सड़कों पर उतरकर लोगों में सुरक्षा भावना बढ़ाने की कोशिश की। लेकिन यह पहल ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई और फिर से दिल्ली की सड़कें सुनसान हो गई।
ऐसे में राजधानी में रहने वाली महिलाएं आज भी रात में घर से निकलने में खुद को सेफ नहीं समझती हैं। यहां तक कि बाहरी दिल्ली के कुछ इलाकों में पुरुष भी अंधेरे में निकलने से कतराते हैं। राजधानी में रहने वाला कोई व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि हर आम आदमी चाहता है कि दिल्ली सरकार ऐसी कोई पहल करे कि वह हर वक्त बेखौफ होकर राजधानी की सड़कों पर घूम सकें।
ट्रैफिक एक बड़ी समस्या
राजधानी में सड़कों के विस्तार और लगातार बन रहे फ्लाईओवर के बावजूद जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है। इस समस्या से हर दिन लोगों को दो-चार होना पड़ता है। दिल्ली यातायात पुलिस में कम पुलिसकर्मियों की तैनाती को इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है।
वहीं दिल्ली पुलिस राजधानी की सड़कों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराती है। ऐसे में दिल्ली की जनता चाहती है कि दिल्ली सरकार ऐसी कोई पहल करे कि दिल्ली वासियों को इस समस्या से निजात मिल सके।