उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की 31 दिसंबर को नोएडा में होने वाले पीएम मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना नजर नहीं आ रही है।
सीएम के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर जब लॉ एंड ऑर्डर IG सतीश गणेश से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पीएम के दौरे को लेकर हुई बैठक में पंचायती राज मंत्री कैलाश यादव को सीएम के प्रतिनिधि के तौर पर चुना गया है।
मुख्यमंत्री की ओर से कैलाश यादव के कार्यक्रम में शामिल होने से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं भी पूरी की जा चुकी है। ऐसे में सीएम की ओर से पंचायत राज मंत्री ही कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
जानिए क्या है दौरे से जुड़े अभिशाप
दरअसल राजनीतिक लिहाज से प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के लिए नोएडा का दौरा कभी भी शुभ नहीं रहा है। वीर बहादुर सिंह, नारायण दत्त तिवारी, कल्याण सिंह और मायावती समेत प्रदेश के जिन मुख्यमंत्रियों ने नोएडा दौरा किया उसके कुछ ही दिनों बाद उन्हें सीएम की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा।
इस बदकिस्मती या यूं कहें कि अभिशाप की शुरूआत 1988 से हुई, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह को नोएडा दौरे के चंद दिनों बाद 1988 में अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। इसके बाद 1997 में मायावती के साथ भी ऐसा ही हुआ।
इससे पहले 1989 में एनडी तिवारी और 10 साल बाद 1999 में कल्याण सिंह के साथ भी यही हुआ। इतना ही नहीं 1995 में मुलायम सिंह यादव भी अपने नोएडा दौरे के बाद सत्ता से बाहर हो गए थे।
नोएडा आने से बचते रहे हैं अखिलेश
अंतिम मुख्यमंत्री के तौर पर मायावती अक्टूबर 2011 में दलित प्रेरणा स्थल के उद्घाटन के लिए नोएडा आई थी। इसके बाद 2012 के
विधानसभा चुनाव में वे सत्ता से बाहर हो गई।
अगस्त 2012 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यमुना एक्सप्रेस वे का उद्घाटन नोएडा से बचते हुए लखनऊ से ही किया। इस साल भी उन्होंने गौतमबुद्ध नगर में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का उद्घाटन शहर में दौरा किए बिना ही किया।
साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने डीएनडी फ्लाई-वे का उद्घाटन किया, लेकिन उन्होंने नोएडा का दौरा नहीं किया। लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 दिसंबर को अपने नोएडा दौरे पर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे की नींव रखेंगे।