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नजीब जंग से मिले अखिलेश, नहीं निकला कोई नतीजा

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दिल्ली की सीमा के अंदर यूपी की जमीन है? इसका इस्तेमाल करने के लिए यूपी सरकार सर्किल रेट के हिसाब से शुल्क मांग रही है, जबकि दिल्ली सरकार 1876 से मालिकाना हक होने के सबूत की बात कर रही है।
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इस मामले को सुलझाने के लिए मंगलवार को यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और दिल्ली के एलजी यूपी सदन में बैठे। जमीन का इस्तेमाल दोनों राज्य साझा रूप से करें, इस पर अनौपचारिक सहमति बनी है, लेकिन अंतिम फैसला दोनों राज्यों के मुख्य सचिव स्तर की बैठक में होगा।

उपराज्यपाल नजीब जंग ने बैठक के बाद मीडिया से कहा कि बातचीत सकारात्मक रही है। दोनों राज्य विकास चाहते हैं। जमीन विवाद जैसी कोई बात नहीं है। जमीन का इस्तेमाल किस तरीके से हो, इस पर बातचीत हुई है। दोनों राज्य साझा तौर पर जमीन का इस्तेमाल करेंगे।
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214 बीघा जमीन के माल‌िकाना हक को लेकर है व‌िवाद

उल्लेखनीय है कि यमुना किनारे की 214 बीघा जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद है। पूर्व उपराज्यपाल तेजेन्द्र खन्ना ने इस मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर दिल्ली का उस जमीन पर हक जताया था। उसमें बताया गया था कि अगर यूपी मालिकाना हक जता रहा है तो कागजात से सिद्ध करे।

दिल्ली के पास 1876 के समय से उन जमीन का मालिकाना है और इसके सबूत हैं। ओखला में जमीन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई थी।

इस बैठक के बारे में नजीब जंग का कहना है क‌ि जमीन से जड़े मामलों पर बातचीत हुई। अब दोनों राज्यों के मुख्य सचिव बैठकर तय करेंगे कि जमीन का इस्तेमाल कैसे हो। साझा इस्तेमाल करेंगे। कोई टाइम फ्रेम नहीं किया। विवाद जैसी कोई चीज नहीं है।
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