नई दिल्ली। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में हाल ही में लद्दाख की ऐतिहासिक धरोहरों पर जलवायु परिवर्तन के खतरे पर चर्चा हुई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण निदेशक सुंदर पॉल ने इसके प्रभावों को रेखांकित किया।
पॉल ने बताया कि लद्दाख के लेह पैलेस और बौद्ध मठ जैसी मिट्टी से बनी संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो रही हैं। यह क्षति अनियमित वर्षा, बादल फटने और बदलते मौसम के कारण हो रही है। उन्होंने इन धरोहरों को बचाने के लिए पारंपरिक और आधुनिक संरक्षण पद्धतियों के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने लेह पैलेस और हेमिस मठ में स्थानीय तकनीकों के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने से बेहतर परिणाम मिलने का अनुभव साझा किया। विशेषज्ञों ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल पुरातत्वविदों की नहीं, बल्कि नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों की भी जिम्मेदारी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईसी के निदेशक केएन श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन एएसआई के पूर्व निदेशक (स्मारक) प्रताप भानु सिंह सेंगर ने किया। संवाद