गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में रिश्वतखोरी का खेल अभी बंद नहीं है। नक्शे की फाइल दिखाने के एवज में जीडीए बाबुओं ने एक हजार रुपये रिश्वत लेते रहे थे।
आवंटी की शिकायत पर आरोप सही साबित हुए। मास्टर प्लान के रिकार्ड रूम में तैनात एक बाबू और एक चपरासी को वीसी ने सस्पेंड कर दिया।
रामेश्वर पार्क, लोनी निवासी कमला सिंह ने अपनी संपत्ति का नक्शा 1992-93 में जीडीए से पास कराया था। कमला सिंह इस संपत्ति पर बैंक से लोन लेना चाह रहे हैं। नक्शा नियमानुसार पास है, इसके लिए बैंक ने जीडीए से फाइल देखने की मांग की थी।
इस पर सिंह ने जीडीए में फाइल देखने के लिए आवेदन किया। फाइल देखने की अनुमति के बावजूद मास्टर प्लान के रिकार्ड रूम में तैनात बाबू शरद और चपरासी वेदपाल कई दिनों से फाइल दिखाने में आनाकानी कर रहे थे। शुक्रवार को दोनों ने आवंटी से 1500 रुपये मांगे।
अंत में मामला एक हजार रुपये में तय हुआ। रुपये देकर फाइल देखने के बाद आवंटी ने वीसी से शिकायत की। इस पर वीसी ने ओएसडी डीपी सिंह और आरपी पाण्डेय को मौके पर भेजा।
जीडीए ओएसडी डीपी सिंह ने बताया कि जांच में आवंटी की शिकायत सही पाई गई। दोनों कर्मचारियों को वीसी ने सस्पेंड कर दिया है।