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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण: फूली नोएडा की सांस, तीन रैंक गिरी...नौवें नंबर पर पहुंचा; मानकों पर नहीं हुआ काम

Wed, 10 Sep 2025 06:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

इस बार तीन नंबर खिसक कर नौवीं रैंक पर पहुंच गया। पिछले साल शहर 3 से 10 लाख तक की आबादी वाली सिटी में छठे नंबर पर था।
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वायु प्रदूषण, file - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में नोएडा का प्रदर्शन पिछले साल से भी खराब रहा है। इस बार तीन नंबर खिसक कर नौवीं रैंक पर पहुंच गया। पिछले साल शहर 3 से 10 लाख तक की आबादी वाली सिटी में छठे नंबर पर था।

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पर्यावरण, वन और जवायु परिवर्तन मंत्रालय ने यह सर्वेक्षण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में कराया है। इसमें नौ मानकों पर आकलन हुआ। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई), जागरूकता के कार्यक्रम, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनकैप ) से जारी बजट के उपयोग के मानकों पर बेहतर काम न होना रैंक गिरने की वजह मानी जा रही है। 

अक्टूबर-नवंबर से दिल्ली-एनसीआर में हर साल प्रदूषण बढ़ जाता है। इस सर्वेक्षण में उन 130 शहरों को शामिल किया गया था जो एनकैप में शामिल हैं। इसमें भी तीन श्रेणी थी। पहली में 10 लाख से ज्यादा, दूसरी में तीन से 10 लाख तक और तीसरी में तीन लाख से कम आबादी वाले शहर शामिल थे। नोएडा दूसरी श्रेणी में था। 
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नोएडा प्राधिकरण ने 200 अंक का दावा करने के साथ आवेदन किया था। आकलन में 184.2 अंक (नौवीं रैंक) मिले। इस तरह नोएडा टॉप-10 में जगह बनाने में तो कामयाब रहा है लेकिन 2024 की तुलना में रैंक गिरना चिंता का विषय है।

प्रदेश के कई शहर आगे
प्रदेश के सात शहरों का प्रदर्शन नोएडा से बेहतर रहा है। ये शहर कम बजट और छोटे-छोटे काम के लिए शासन पर निर्भर रहते हैं। नोएडा की श्रेणी में महाराष्ट्र के अमरावती शहर ने 200 में 200 नंबर के साथ पहला स्थान हासिल किया है। यूपी के मुरादाबाद व झांसी दूसरे नंबर पर, गोरखपुर पांचवें, बरेली सातवें नंबर पर रहा हैं। इन शहरों का प्रदर्शन पिछले वर्ष की तुलना में सुधरा है। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में आगरा तीसरे, कानपुर पांचवें, प्रयागराज सातवें नंबर पर रहा है। 

प्राधिकरण तलाश रहा वजह
रैंक गिरने के बाद प्राधिकरण सर्वेक्षण में नंबर कटने की वजह तलाश रहा है। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उद्योगों को ग्रीन फ्यूल पर ले जाने के मानक पर नंबर कटे हैं। इस रिपोर्ट को देखा जाएगा। एनकैप में शामिल शहरों को केंद्र के जरिये बजट का भी आवंटन होता है। 

इसका उपयोग बताई गई तैयारियों के लिए करना होता है। नोएडा को करीब 56 करोड़ रुपये एक वर्ष में मिले हैं लेकिन अब तक पूरी धनराशि का उपयोग नहीं हो पाया है। सर्वेक्षण के मानक में वायु गुणवत्ता, पक्की सड़क, मैकेनिकल स्वीपिंग, बचे कूड़े का निस्तारण, निर्माण व ध्वस्तीकरण मलबे का निस्तारण, कूड़ा निस्तारण स्थल का किसी उद्यान में परिवर्तन, ग्रीन बेल्ट का विकास, इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, मियावाकी पद्धति से पौधरोपण, उद्योगों को ग्रीन ईंधन पर लेकर जाना शामिल थे। 
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सर्वेक्षण के परिणाम का अध्ययन जन स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। अगले सर्वेक्षण की तैयारियां और बेहतर तरीके से प्राधिकरण करेगा। रैंक भी अच्छी होगी।
-संजय खत्री, एसीईओ, नोएडा प्राधिकरण

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