सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अपनी दो शर्तें बताते कहा कि पहली शर्त यह है कि यह बैठक जेपी नड्डा के घर पर नहीं होगी। यह मीटिंग जंतर-मंतर पर होगी या किसी न्यूट्रल जगह पर होगी। दूसरी शर्त रखी कि सरकार को ठोस बात करनी होगी। बताना होगा कि कब तक मांगें पूरी होंगी।
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखी यह बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
पीएम मोदी के ट्वीट पर सीजेपी की प्रतिक्रिया
सीजेपी प्रवक्ता, सौरव दास ने कहा, पेपर लीक में शामिल लोगों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने के पीएम मोदी के ट्वीट पर उन्होंने कहा, 'ऐसे एलान किसी काम के नहीं हैं। ये सिर्फ लोगों को गुमराह करने की कोशिशें हैं। हम जवाबदेही और जिम्मेदारी चाहते हैं। हम इस मामले पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र के इस्तीफे के स्तर से नीचे के किसी भी व्यक्ति से चर्चा नहीं करेंगे।'
केजरीवाल ने पीएम मोदी के ट्वीट पर कही यह बात
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने कहा कि 'आज सुबह प्रधानमंत्री ने एलान किया है- पेपर लीक मामलों के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाये जाएंगे। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का क्या हुआ? प्रधानमंत्री का ये स्टेटमेंट एक हारे हुए दिशाहीन लेकिन अहंकारी व्यक्ति का लगता है।'
हिंसक भीड़ में फंसे पुलिस अफसर ने बताई आपबीती
एसीपी विवेक भगत ने कहा कि वो कल सेक्टर वन ज़ोन वन में ड्यूटी पर थे जिसमें मेन जंतर मंतर एरिया आता है। दिन में ड्यूटी पर थे और शाम की शिफ्ट भी थी, तो शाम की शिफ्ट में, वो रीगल बिल्डिंग से, जो कनॉट प्लेस है, संसद मार्ग होते हुए, टॉल्स्टॉय और संसद मार्ग की रेड लाइट पर रिपोर्ट करने जा रहा था।
मेरे साथ 5-6 लोगों का स्टाफ था जो आगे चल रहा था और मेरे साथ एक एसीपी प्रोबेशनर रोहित और मेरा ऑपरेटर नवनीत था। तो जैसे ही हम आगे चल रहे थे, हमने देखा कि आगे स्टाफ पर पानी की बोतलें फेंकी जा रही थीं और पुलिस के खिलाफ हूटिंग और एंटी-सोशल नारे लगाए जा रहे थे। जैसे ही हमारा पुलिस स्टाफ वहां थोड़ा आगे-पीछे हुआ, उनमें से कुछ अपनी जान बचाने के लिए आगे बढ़े और उनमें से एक को भीड़ ने पकड़ लिया। उसके सिर से खून निकल रहा था। उसका पूरा चेहरा खून से लथपथ था, तो मैंने उसे वहां से बचाने के लिए बीच-बचाव करने की कोशिश की। हम उसे एक-दो मीटर आगे भी ले आए, लेकिन भीड़ बड़ी और हिंसक थी पुलिस अधिकारियों को खास तौर पर निशाना बनाया गया।