पार्टी के कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने शनिवार को दिपके की गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी थी। उन्होंने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) अदालत से तत्काल रिहाई का आग्रह किया था। सिंह ने मौलिक अधिकारों और उचित प्रक्रिया के घोर उल्लंघन का आरोप लगाया था। एक्स पर एक पोस्ट में, सिंह ने सवाल उठाया कि नागरिकों को शांतिपूर्ण राष्ट्रीय प्रदर्शन में भाग लेने के लिए कहना अपराध कैसे हो सकता है। उन्होंने लिखा कि एसईएम अदालत को दिपके को रिहा करना चाहिए, क्योंकि उनकी गिरफ्तारी गैरकानूनी है। सिंह ने दिपके को उनके आवास के ठीक बाहर से उठाए जाने के तरीके पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने उनके ठिकाने का तुरंत खुलासा नहीं किया। उनके कानूनी वकील को भी उनसे मिलने नहीं दिया गया।
गिरफ्तारी और आरोप
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को दिपके को हिरासत में लिया था। उन्हें कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में निर्धारित 'लहरा दो तिरंगा' रैली का नेतृत्व करने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। अधिकारियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू की थी। इसके तहत मध्य दिल्ली में सार्वजनिक सभाओं पर सख्त निषेधाज्ञा लगाई गई थी।
विरोध प्रदर्शन और मामले
यह हिरासत मतदाता सूची संशोधन में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ व्यापक प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में हुई है। पुलिस ने लगभग 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की सूचना दी और कई प्राथमिकी दर्ज कीं। यह कार्रवाई सार्वजनिक चेतावनियों के बावजूद भीड़ इकट्ठा होने और निषेधाज्ञा के उल्लंघन के बाद हुई। घटना के बाद, पुलिस ने दिपके पर बीएनएसएस की धारा 126 और 170 के तहत एक नई निवारक कार्यवाही में मामला दर्ज किया। यह मामला 10 अक्तूबर की पिछली कार्यवाही से अलग है, जिसमें दिपके को एक वर्ष के लिए शांति बॉन्ड वचनबंध पर हस्ताक्षर करना था।