अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने वर्ष 2016 के सिविल लाइन्स हिट एंड रन मामले में नाबालिग आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 भाग-दो के तहत मुकदमा चलाने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने आरोपी की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए कहा कि किशोर न्याय बोर्ड द्वारा आरोप तय करने में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। अदालत ने कहा कि आरोपी तेज रफ्तार से वाहन चलाने का आदी था और घटना के समय उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था। कोर्ट ने बचाव पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि केवल तेज गति या लाइसेंस न होना धारा 304(2) लगाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि घटना के समय आरोपी की उम्र 17 वर्ष 11 माह 26 दिन थी और वह मर्सिडीज कार को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चला रहा था, जबकि इलाके में अधिकतम गति सीमा 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित थी। कार में मौजूद अन्य युवकों ने भी बयान दिया कि आरोपी तेज और लापरवाही से वाहन चलाने की आदत रखता था।