मंगलवार को इसी प्रकरण में सिटी मजिस्ट्रेट महेंद्र कुमार सिंह को शासन ने एडीएम (न्यायिक) बनाकर बलरामपुर में तैनात कर दिया है। बलरामपुर को उनके लिए सजा के रूप में देखा जा रहा है। शासन ने जिले के अफसरों से सूचना मांगी थी कि 14 अगस्त को किन-किन अधिकारियों ने पुलिस अफसरों को फोन करके या थाने पहुंचकर सिफारिश की थी। उसी रिपोर्ट में जिला प्रशासन ने सिटी मजिस्ट्रेट का नाम भेजा था। हालांकि , सिटी मजिस्ट्रेट का प्रमोशन होना था और आसपास के ही जिले में तैनाती की बात चल रही थी।
आरोप है कि एडीएम ने यहां तैनात अफसरों को खुद फोन करने के साथ ही कुछ आला अफसरों से भी फोन कराए थे। जिस तरीके से एडीएम ने घटना को बताया था तो यहां की पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को लगा कि एडीएम की पत्नी के साथ छेड़छाड़, मारपीट व अपहरण का प्रयास हुआ।
साथ ही, एससी-एसटी का मामला है। लिहाजा जितनी बड़ी और जल्दी कार्रवाई होगी तो वाहवाही मिल जाएगी। यही कारण रहा कि सिटी मजिस्ट्रेट पर स्थानीय अधिकारियों के साथ ही प्रदेश के कुछ अन्य अफसरों का भी दबाव था।
मामले में पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों पर तो गाज गिर गई है, लेकिन अभी तक प्राधिकरण अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके लेकर सोशल मीडिया पर लोग जमकर प्राधिकरण के खिलाफ भड़ास निकालकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
3 साल से लगातार रिटायर्ड कर्नल अतिक्रमण की शिकायत करते रहे। पहले एडीएम ने ग्राउंड फ्लोर पर अवैध निर्माण कराया। फिर उस पर प्रथम मंजिल पर बरामदा बना लिया। अगर प्राधिकरण शिकायत पर कार्रवाई करता तो पुलिस-प्रशासन को फजीहत नहीं होती।
आज से हस्ताक्षर अभियान
सीओ व इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी की मांग पूरी न होने से पूर्व सैन्य अधिकारी नाराज हैं। इसे लेकर बुधवार को पूर्व सैन्य अधिकारी शहीद स्मारक स्थल पर एकत्र होंगे। इसमें लोगों और पूर्व सैन्य अधिकारियों व उनके परिवारों को बुलाया गया है। मीडिया के सामने ही रिटायर्ड कर्नल हस्ताक्षर अभियान को शुरू करेंगे। इसके बाद हस्ताक्षरयुक्त पत्र को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा जाएगा जिसमें पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर रोष व्यक्त किया जाएगा।