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Study: अब आसान टेस्ट से होगी क्रॉनिक डायरिया की सही पहचान, भविष्य में बड़े स्तर पर अपनाया जा सकता है यह तरीका

Sat, 28 Mar 2026 03:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अब एक साधारण मल (स्टूल) टेस्ट से बीमारी का पता लगाया जा सकेगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। 
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demo - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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लंबे समय से दस्त (क्रोनिक डायरिया) से परेशान मरीजों के लिए राहत की खबर है। अब एक साधारण मल (स्टूल) टेस्ट से बीमारी का पता लगाया जा सकेगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। 

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डॉ. गोविंद के. मखारिया के नेतृत्व में अध्ययन किया गया, जो इंडियन जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ता शुभम मेहता, समग्र अग्रवाल, आदित्य विक्रम पचीसिया और विकास सचदेव के अनुसार, यह तरीका भविष्य में बड़े स्तर पर अपनाया जा सकता है।

अध्ययन में सामने आया है कि बाइल एसिड मालएब्जॉर्प्शन (बीएएम) का पता अब आसान तरीके से लगाया जा सकता है। यह पित्त अम्ल कुअवशोषण एक पाचन संबंधी विकार है, जो पुराने दस्त का एक आम लेकिन अक्सर अनजाना कारण है। अब तक बीएएम की जांच के लिए जो टेस्ट उपलब्ध थे, वे काफी जटिल थे। 
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नए शोध में मल के एक ही सैंपल में बाइल एसिड (एफबीए) की मात्रा मापी जाती है। इसके लिए एंजाइम आधारित स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

लगभग 21 प्रतिशत मामलों में बीएएम मिला
अध्ययन में पाया गया कि यदि एफबीए का स्तर 2.8 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम या उससे अधिक होता है, तो बीएएम की पहचान काफी सटीक तरीके से की जा सकती है। इस टेस्ट की संवेदनशीलता 89.5 प्रतिशत और विशिष्टता 92 प्रतिशत पाई गई।

  • डायरिया-प्रधान इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) और फंक्शनल डायरिया से पीड़ित मरीजों में लगभग 21 प्रतिशत मामलों में बीएएम पाया गया। वहीं, जिन मरीजों की पित्ताशय (गॉलब्लैडर) की सर्जरी हो चुकी थी, उनमें यह समस्या 57 प्रतिशत तक पाई गई। आंतों के तपेदिक से ग्रस्त मरीजों में भी 54.5 प्रतिशत मामलों में बीएएम की पुष्टि हुई
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