भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ी तकरार ने चाइनीज उत्पादों के बाजार को जोर का झटका दिया है। हर बार दिवाली से पहले बाजारों में मेड इन चाइना का बोलबाला होता था, लेकिन इस बार मेड इन इंडिया की धूम दिखाई दे रही है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक चली हवा ने खरीदारों को चाइनीज उत्पादों से दूर कर दिया है।
व्यापार जगत से जुड़े लोगों की मानें तो त्योहार के सीजन में हर साल औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में 1200 से 1500 करोड़ रुपये की खरीदारी होती है। जिसमें तकरीबन 60 फीसदी हिस्सेदारी चाइना की होती है लेकिन इस बार चाइनीज उत्पाद खरीदारों को तरस रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान के खिलाफ हुई सर्जिकल स्ट्राइक से पहले ही चाइनीज उत्पादों का स्टॉक एकत्रित करने वाले व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बाजार से अचानक इनके खरीदार गायब हो गए हैं।
भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ी तनातनी के बीच चाइना का खुलकर पाकिस्तान के समर्थन में आना भारतीयों को रास नहीं आ रहा है। दीपावली के त्योहार में एक सप्ताह से कम का समय शेष है। बाजार दुल्हन की तरह सज चुका है। बहिष्कार के चलते बाजार में चाइना निर्मित वस्तुओं की खरीदारी में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। फरीदाबाद इलैक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी पांडेय ने बताया कि बाजारों में दिवाली के मौके पर तकरीबन 500 करोड़ रुपये के इलैक्ट्रोनिक आइटम का कारोबार होता है।
इनमें करीब 300 करोड़ रुपये के चाइनीज उत्पादों की हिस्सेदारी होती है। अधिकांश ट्रेडर्स महीने दो महीने पहले ही उत्पाद मंगाकर स्टॉक कर लेते हैं। अब जब चाइनीज उत्पादों का विरोध हो रहा है तो ऐसे में सबसे बड़ी मुश्किल उन व्यापारियों की बढ़ गई है जिन्होंने दिवाली के लिए चाइनीज स्टॉक एकत्रित करने में लाखों रुपये खर्च कर दिए। वहीं, गिफ्ट आइटम, खिलौने, सजावटी सामान, हेंडीक्राफ्ट जैसे चाइनीज उत्पादों में 50 फीसदी तक की गिरावट देखी जा रही है।
चाइना वस्तुओं में सबसे अधिक खिलौने, गिफ्ट आईटम, सजावटी सामान, इलेक्टॉनिक सामान सस्ते दामों में बेचा जाता है, लेकिन जागरूकता की वजह से इस बाद दुकानदारों ने चाइना सामान से दूरी बना ली है। बहिष्कार के कारण बाजार में मिट्टी के दीपों की खरीदारी जोरों पर है। सोमवार को बाजार में महिलाओं ने बड़ी संख्या में मिट्टी के बने दीये खरीदें। चाइनीज उत्पादों के खिलाफ बने माहौल का असर यह है कि ग्राहक मेड इन चाइना का टैग देखकर खरीदारी कर रहे हैं।
बाजार में नहीं है चाइना निर्मित प्रतिमा
व्यापारी संजय भाटिया कहते हैं कि मार्केट नंबर एक में बड़ी मात्रा में चाइना निर्मित प्लास्टिक की मूर्तियां आती थी। इस बार पिछले पंद्रह दिन से दिल्ली से सामान नहीं आने के कारण व्यापारियों ने भारत में बनी मिट्टी की मूर्तियों को खरीदा है। व्यापारी खुद चाइना की वस्तुओं को नहीं बेचना चाहते हैं। ऐसे में ग्राहकों द्वारा मिट्टी की गणेश, लक्ष्मी एवं कुबेर की प्रतिमा को खरीदा जा रहा है। मिट्टी की यह प्रतिमा 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक में मिल रही है। चाइनीज लडिय़ों की जगह मिट्टी के दीये खरीदने में ज्यादा रुचि दिखाई जा रही है।
जिनके पास स्टॉक, उनकी बिगड़ी दिवाली
जानकारी के अनुसार अधिकांश व्यापारियों ने दो माह पूर्व चाइना की लडियां, झालर, सजावटी सामान, दीये का भारी स्टॉक कर रखा था। बाजार में चाइना के विपरीत माहौल चलने के कारण सामान शोपीस बनकर रह गया। बताया जा रहा है कि छोटी-बड़ी दुकानों को मिलाकर करीब 150-200 करोड़ रुपये का स्टॉक धूल फांक रहा है।
न के बराबर हो रही खरीदारी
पहले से चाइना निर्मित साज सज्जा व लाइटिंग जैसे उत्पादों का स्टॉक कर रखा था। इस बार यह सिर्फ शो पीस बनकर रह गए हैं। पता होता तो पूर्व में खरीदारी नहीं करते। चाइनीज आइटम न के बराबर बिक रहे हैं।-गिरीश, व्यापारी
बिक्री न होने से भारी नुकसान
बाजार में इस बार चाइना निर्मित वस्तुओं की बिक्री बेहद कम है। गत वर्ष का स्टॉक भी रखा था और इस बार भी स्टॉक मंगाया था लेकिन अब भारी नुकसान हो रहा है।-अमन, व्यापारी
चाइनीज उत्पादों की मांग नहीं
इस बार माहौल को देखते हुए कोई स्टॉक नहीं किया है। पुराना थोडा बहुत सामान है। अब ग्राहकों की ओर से भी चाइनीज उत्पादों की मांग नहीं की जा रही है।-रमेश शर्मा, इलेक्टॉनिक विक्रेता