15 अगस्त के मौके पर इस बार आकाश में स्वदेशी पतंग ही उड़ान भरती नजर आएंगी। हवा में लहराती चीन की प्लास्टिक से निर्मित ना तो पतंग दिखेगी और ना ही जानलेवा मांझा। दिल्ली के सबसे बड़े पतंग के मार्केट लाल कुंआ में पतंग विक्रेता भी चीनी मांझे से परहेज कर रहे हैं। खास बात यह है कि चोरी-छिपे भी चीनी मांझे नहीं बिक रहे हैं। हालांकि, इस बार पतंगबाजी के शौकीन लोगों जो जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। क्योंकि, पतंग व मांझे की कीमत दोगुना हो गई है।
चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के कारण पतंग मार्केट में सिर्फ स्वदेश निर्मित पतंगें दिखाई पड़ रही हैं। हालांकि, पिछले साल के स्टॉक में जिनके पास कुछ माल बचा है वह जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन उसकी संख्या भी बहुत कम है।
बाजार में ढूंढने से भी नहीं मिलेगा चीनी मांझा
हर साल की तरह इस साल चीनी मांझा बाजार से गायब है। दुकानदार स्पष्ट कह रहे हैं कि चीनी मांझा सस्ता जरूर है, लेकिन जानलेवा होने के कारण बिक्री नहीं की जा रही है। उसकी जगह स्वदेश निर्मित मांझा चरखी में बेचा जा रहा है।
खरीदार कम, लेकिन महंगाई चरम पर
पिछले साल की तरह पतंगबाजी को लेकर बहुत ज्यादा खरीदारी इस साल नहीं है। बावजूद, पतंग व मांझे काफी महंगे बिक रहे हैं। पिछले साल जिस पतंग के पैकेट 60 रुपये में मिल रहे थे वह इस साल 110 रुपये में बिक रहे हैं। इसी तरह चार रील वाला मांझा 300 से 400 रुपया में बिक रहा है। दुकानदार अमित कुमार का कहना है कि चीनी मांझा व पतंग बाजार में उपलब्ध नहीं होने के कारण महंगाई ज्यादा बढ़ गई है।
रोजगार भी बदला
कई दुकानदारों ने अपना रोजगार भी बदल दिया है। कोरोना वायरस का प्रभाव व्यापारियों पर सबसे अधिक पड़ा है। इस वजह से कई व्यापारी यहां तक कि मूर्ति बनाने वाले कारीगर भी इन दिनों पतंग ही बेच रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि रोजगार खत्म होता देख और पतंग की मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।