7 से 17 साल के बच्चों ने विधायक की सीटों पर बैठकर प्रदूषण, पानी और हरित क्षेत्र पर रखे विचार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विधानसभा में बुधवार को 7 से 17 साल के बच्चों ने विधायकों की सीटों पर बैठकर पर्यावरण और टिकाऊ विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद में बच्चों ने प्रदूषण, जल संरक्षण, हरित क्षेत्र और जिम्मेदार नागरिकता जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बच्चों की तथ्यपूर्ण और शांतिपूर्ण बहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदन संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का मंच है। बच्चों ने सवाल करने, अलग-अलग विचार सुनने और तर्क के आधार पर अपनी बात रखने की क्षमता दिखाई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने के साथ असहमति को समझना और समाधान की दिशा में आगे बढ़ना भी जरूरी है।
गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण मानव जीवन से सीधे जुड़ा विषय है। पेड़ों का संरक्षण साफ हवा के लिए जरूरी है, जबकि पानी की उपलब्धता और घटता हरित क्षेत्र आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ी चुनौती हैं। आज किए गए फैसले ही तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियों को कैसी दुनिया मिलेगी।
बच्चों ने जाना सदन का कामकाज :
बाल संसद को विधानसभा कक्ष में आयोजित करने का उद्देश्य बच्चों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव देना था। बच्चों ने संसदीय प्रक्रिया को करीब से समझा और बहस में हिस्सा लिया। स्पीकर ने कहा कि किताबों और परीक्षाओं के साथ अनुभव से सीखना भी जरूरी है।
कार्यक्रम में उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट समेत कई विधायक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न और विजेताओं को हरित नवांकुर, बाल संसद चेंज मेकर, बेस्ट ओरेटर, बेस्ट पार्लियामेंटेरियन, बाल रिसर्चर, बेस्ट जर्नलिस्ट और बाल संसद आइकन समेत विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। स्पीकर ने बच्चों से सवाल पूछते रहने और देश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।