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बाल दिवस स्पेशल : इनके हुनर में समाये चाचा नेहरू के सपने

Tue, 14 Nov 2017 12:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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वर्षा, दृष्ट‌ि, र‌िया और त्र‌‌िशा (बाएं से दाएं) - फोटो : अमर उजाला
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हुनर की न कोई उम्र होती है और न ही कोई सीमा। हौसला हो तो ऊंची से ऊंची उड़ान भी आसानी से भरी जा सकती है। शहर के ऐसे ही कई होनहार चाचा नेहरू के सपनों को अपनी आंखों में संजोकर कामयाबी की इबारत लिखने में जुटे हुए हैं।
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ये प्रतिभाएं बॉलीवुड से लेकर खेल की दुनिया में अपनी छाप छोड़ रही हैं। किसी के बाल मन में संगीत का सरताज बनने का ख्वाब पल रहा है तो कोई खेल के क्षेत्र में बुलंदियों को हासिल कर रहा है। पेश है एक रिपोर्ट:-

मां ने पहचाना दृष्टि का हुनर
सेक्टर 10 में रहने वाली दृष्टि शर्मा पिछले आठ वर्ष से अपनी आवाज का जादू बिखेर रही हैं। उसकी गायकी के हुनर को सबसे पहले मां ने पहचाना और फिर उसे सपने को पूरा करने की ठानी। इस बार बाल दिवस के अवसर पर दृष्टि को दिल्ली में लोक कला मंच की ओर से सम्मानित किया जाएगा। वह डीएवी पब्लिक स्कूल सेक्टर-14 में कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 30 मंचों पर अपनी आवाज का जादू बिखेर चुकी हैं। गुरु अंजू मुंजाल के पास गायिकी सीख रही हैं। वह राइजिंग स्टार शो में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। अलवर में रागा हारमनी 2017 के क्लासिकल संगीत में पहला अवार्ड और आगरा में भी अवार्ड हासिल किया।
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बिजली की गति से थिरकते हैं रिया के कदम
शहर की रिया शर्मा मंच पर बिजली की गति की तरह नृत्य करती हैं। इनके कदम जब थिरकते हैं तो तालियों की आवाज गूंज उठती है। शहर की ग्रीन फील्ड कॉलोनी की रहने वाली रिया को बाल दिवस पर हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी सम्मानित करेंगे। कथक नृत्य एवं गायकी के हुनर ने रिया को पहचान दिलाई है। 11 वर्षीय रिया सेक्टर-14 स्थित डीएवी स्कूल में सातवीं कक्षा की छात्रा हैं। सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले सुपर डांसर शो में अपना टैलेंट दिखा चुकी हैं। पिछले दिनों सुपर डांसर फरीदाबाद में प्रथम रहीं। इसकेे अलावा दिल्ली के श्रीराम ऑडिटोरियम में परफॉर्मेंस दे चुकी हैं। उन्होंने क्लासिकल डांसर बनने की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए है।

लड़कों की तरह क्रिकेट खेलती है वर्षा
पल्ला निवासी वर्षा लड़कों की तरह क्रिकेट खेलती हैं। वह सराय ख्वाजा स्थित सरकारी स्कूल में कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। शिक्षा विभाग की तरफ से आयोजित अंडर-17 स्टेट स्कूली क्रिकेट प्रतियोगिता के चैंपियन रहने पर नेशनल टीम के लिए चयन हो गया है। वर्षा बल्लेबाज होने के साथ स्पिनर गेंदबाजी में माहिर है। प्रदेश स्तर पर 6 पदक जीत चुकी हैं। वर्ष 2008 में क्रिकेट से जुड़ी थीं। पिता संजय कुमार क्रिकेट कोच होने के कारण बेटी को क्रिकेट के गुर सिखाते रहते हैं। वर्षा अपने पिता के साथ सुबह के समय क्रिकेट के मैदान में पहुंच जाती हैं। भारतीय महिला क्रिकेट टीम में शामिल होना उनका सपना है।

त्रिशा को एशियन खेल खेलने का जुनून
शहर की रहने वाली त्रिशा पॉल में टेबल टेनिस के प्रति जुनून है। इस खेल के प्रति इतना आकर्षण है कि अब तक 70 से अधिक पदक इनके खाते में हैं। हाल ही में गाजियाबाद में हुई सीबीएसई नेशनल टेबल टेनिस टूर्नामेंट में पहला राष्ट्रीय पदक हासिल किया। कोच अंकित ने बताया कि त्रिशा ने बंगाल की नेहा कुमारी को हराकर जीत दर्ज की। अब नियमित रूप से चार से पांच घंटे अभ्यास करती है। वह खुद को एशियन खेलों के लिए अभी से तैयार कर रही हैं। वह अपने लक्ष्य के प्रति अधिक एकाग्र है।
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