उन्होंने बताया कि स्कूल की मेस बंद थी जहां बच्चों को खाना दिया जाता है। इस समय बच्चे घर से टिफिन लेकर आ रहे हैं। अब हमें खाद्य विभाग की रिपोर्ट आने का इंतजार है।
सबूत मिटाने की जांच पुलिस व बाकी विभाग कर रहे हैं। नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि हमारा मुख्य उद्देश्य दो बिंदुओं पर है। पहला ऐसी घटना दोबारा यहां और जनपद के किसी भी स्कूल में न हो। इसके लिए सभी स्कूलों में जांच की जा रही है।
अभियान चलाकर सैंपल लिए जा रहे हैं। दूसरा सभी स्कूलों को गाइड लाइन जारी की जा रही है जिसमें यह लिखा जाएगा कि यदि इस तरह का कोई भी घटना होती है तो कानूनी रूप से स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। स्वास्थ्य विभाग खुद स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएगा।
अभिभावकों को शक है कि पानी पीने से बच्चों की तबियत खराब हुई हैं। पांच दिन बाद स्वास्थ्य विभाग पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजने का मन बना रहा है।
वहीं, पानी की शिकायत के बाद प्रबंधन द्वारा स्कूल में लगे सभी फिल्टरों को बदल दिया गया है। जाहिर है यह सैंपल सिर्फ खाना पूर्ति के लिए जा रहे हैं।
इधर, पुलिस विभाग द्वारा मामले में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन ने बीमार बच्चों के अभिभावकों पर दबाव बनाया है जिसका सीधा असर जांच पर पड़ रहा है।