कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज और मौत के आंकड़ों को लेकर दिल्ली में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दिल्ली सरकार और अस्पतालों में होने वाली मौतों के बीच काफी अंतर देखने को मिल रहा है। इसे लेकर रविवार को दिल्ली के मुख्य सचिव ने सरकारी और निजी अस्पतालों को फटकार लगाते हुए समय पर जानकारी देने के आदेश दिए हैं।
मुख्य सचिव विजय देव ने पत्र में लिखा है कि हर दिन ई-मेल के जरिए शाम साढ़े पांच बजे तक डेथ ऑडिट कमेटी के पास रिपोर्ट भेजना अनिवार्य है। 20 अप्रैल को दिल्ली सरकार डेथ ऑडिट कमेटी का गठन कर चुकी है। अब तक इस कमेटी की ओर से करीब 38 मौतों का ऑडिट किया जा चुका है।
‘अमर उजाला’ ने रविवार को दिल्ली सरकार और लोकनायक अस्पताल के बीच मौत के अंतर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। लोकनायक अस्पताल में बीते 8 मई की सुबह 9 बजे तक 55 लोगों की मौत कोरोना वायरस से हो चुकी है, जबकि दिल्ली सरकार के अब तक सामने आए हेल्थ बुलेटिन में मौत का आंकड़ा इस अस्पताल में सिर्फ पांच ही दिखाया जा रहा है।
ई-मेल के जरिए जिला प्रशासन को रिपोर्ट देंगे अस्पताल
पत्र में लिखा है कि रिपोर्ट नहीं भेजने पर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बार-बार कहने पर भी अस्पतालों की ओर से मृत्यु रिपोर्ट समय पर नहीं दी जा रही है। अस्पतालों से रिपोर्ट ई-मेल के जरिए जिला प्रशासन और वहां से डेथ ऑडिट कमेटी के पास पूरी जानकारी पहुंचेगी। कमेटी से पास होने के बाद ही मौत के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे। जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के एक शीर्ष अधिकारी को नोडल ऑफिसर बनाया है। साथ ही हर जिले में एक-एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त कर दिया है।
रिपोर्ट नहीं मिली तो नोटिस, कार्रवाई
आदेश में यहां तक लिखा है कि अगर शाम 5 बजे तक रिपोर्ट संबंधित अस्पतालों से नहीं आती है तो तत्काल उक्त नोडल अधिकारी स्टेट सर्विलांस ऑफिसर को सूचना देगा, ताकि संबंधित अस्पताल को निर्देश दिए जा सकें। अगर फिर भी रिपोर्ट नहीं मिलती है तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी जाएगी। अगर रिपोर्ट नहीं मिलती है तो संबंधित को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।