इनमें जन लोकपाल कानून, स्वराज कानून बनाने, बिजली बिल आधे करने, बिजली कंपनियों का ऑडिट सीएजी से कराने, हर परिवार को प्रति माह 20,000 लीटर मुफ्त पानी, सार्वजनिक स्थानों पर फ्री वाईफाई, 15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने, चार लाख टॉयलेट बनाने, बसों में महिला पुलिस और हर साल लाखों नौकरियां देने जैसे कई वादे थे।
इनमें से कुछ पर काम हुआ है, कुछ पर आधा अधूरा हुआ है और मुफ्त वाईफाई जैसे कई विषय हैं जिन पर अभी सरकार ने काम शुरू ही नहीं किया है। अब जल्द ही देश चुनावी मोड़ में आने वाला है और तब जनता केजरीवाल से उनके वादों के बारे में पूछेगी।
केजरीवाल सरकार का आगाज ही केंद्र सरकार और उपराज्यपाल के साथ टकराव से हुआ था। चाहे जन लोकपाल विधेयक हो या फिर मंत्रिमंडल के दूसरे फैसले, राज्य सरकार ने उपराज्यपाल को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। इसी के बाद उनके सभी काम राजभवन में जाकर अटक जाते थे।
kejriwal and sheila dixit
शीला दीक्षित के पंद्रह साल के शासन और केजरीवाल के तीन साल की सरकार में मूल फर्क सिर्फ सर्विसेज (नौकरशाही) के केंद्र के पास चले जाने का था।
यही वजह था कि शीला सरकार ने हजारों करोड़ रुपये के बिजली वितरण के निजीकरण के फैसले को राजभवन की मंजूरी के लिए नहीं भेजा और तत्कालीन एलजी ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई।
वहीं केजरीवाल के हर फैसले पर उपराज्यपाल के सवाल जवाब हो रहे थे। केजरीवाल का आरोप है कि दिल्ली सरकार की 400 से ज्यादा फाइलें एलजी के पास अटकी थीं। लेकिन अब यह समस्या खत्म हो गई है।